शिक्षक भर्ती: रायपुर में डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन जारी, 135 अभ्यर्थी अब तक हुए अस्पताल में भर्ती
छत्तीसगढ़ राज्य की सहायक शिक्षक भर्ती 2023 से जुड़े डीएड (डीईएलईडी) अभ्यर्थी न्यायालयीन आदेशों के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने से आक्रोशित हैं। इसी मांग ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 11 Jan 2026 09:27:44 AM (IST)Updated Date: Sun, 11 Jan 2026 09:27:44 AM (IST)
अभ्यर्थीअस्पताल में भर्ती नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य की सहायक शिक्षक भर्ती 2023 से जुड़े डीएड (डीईएलईडी) अभ्यर्थी न्यायालयीन आदेशों के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने से आक्रोशित हैं। इसी मांग को लेकर 24 दिसंबर से नवा रायपुर तूता धरना स्थल पर आमरण अनशन जारी है। कड़ाके की ठंड के बीच चल रहे इस आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों की तबीयत लगातार बिगड़ रही है।
अभ्यार्थियों का क्या कहना
अभ्यर्थियों ने बताया कि कड़ाके की ठंड के बावजूद रात में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा कोई रूटीन जांच नहीं की जा रही है। आमरण अनशन के दौरान शनिवार को चार अभ्यर्थियों की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिन्हें तत्काल अस्पताल रेफर करना पड़ा। अब तक 135 अभ्यर्थी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं।
संयुक्त डीएड अभ्यर्थी संगठन के अनुसार लंबे समय से चले आ रहे आंदोलन, मानसिक तनाव और शारीरिक कमजोरी के कारण अभ्यर्थियों की स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ रही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी अभ्यर्थी के स्वास्थ्य को गंभीर क्षति पहुंचती है या कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो इसकी संपूर्ण नैतिक, प्रशासनिक एवं संवैधानिक जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
धरना स्थल पर जोगी पार्टी के नेता अमित जोगी भी प्रदर्शन में शामिल हुए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि सहायक शिक्षक भर्ती 2023 की प्रक्रिया में वे पूरी तरह योग्य हैं, इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति से वंचित रखा गया है। न्यायालयीन आदेशों के बाद भी अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से गहरा असंतोष है।
हर बार केवल आश्वासन
आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्होंने कई बार ज्ञापन, प्रदर्शन और संवाद के माध्यम से अपनी मांग शासन तक पहुंचाई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। धरना स्थल पर मौजूद अभ्यर्थियों का कहना है कि वे रोजगार नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकार की मांग कर रहे हैं। डीएड अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब और भेदभावपूर्ण रवैये के कारण सैकड़ों परिवार आर्थिक व मानसिक संकट से जूझ रहे हैं।
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