
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी रायपुर में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। शहर के कई इलाकों में नलों से गंदा, बदबूदार और दूषित पानी आ रहा है, लेकिन अब तक नगर निगम की ओर से पानी की सैंपलिंग शुरू नहीं की गई है। जबकि शहर की बड़ी आबादी निगम की जल आपूर्ति पर निर्भर है और कई कॉलोनियों में बिना जांच के बोरवेल का पानी भी उपयोग में लाया जा रहा है। यह स्थिति सीधे तौर पर आमजन की सेहत से जुड़ा गंभीर मामला बन गई है।
लगातार आ रही हैं शिकायतें
गायत्रीनगर, कचना हाउसिंग बोर्ड, टिकरापारा और शंकरनगर सहित कई इलाकों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। रहवासियों का कहना है कि नल खोलते ही गटर जैसी दुर्गंध फैल जाती है और कई बार पानी में काले कण व गंदगी तैरती नजर आती है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई घरों में उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार के मामले बढ़ गए हैं।
कचना में बढ़ी परेशानी
कचना हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में पिछले एक महीने से हालात बेहद खराब बने हुए हैं। लोग मजबूरी में पानी उबालकर पी रहे हैं, फिर भी बीमारियां कम नहीं हो रही हैं। कई परिवारों को नहाने तक के लिए बाहर से पानी मंगवाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ साल पहले इसी इलाके में दूषित पानी पीने से एक महिला की मौत भी हो चुकी है, लेकिन इसके बाद भी कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
सीवर चेंबर से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन
रहवासियों का आरोप है कि कई स्थानों पर पेयजल पाइपलाइन सीधे सीवर चेंबर के भीतर से गुजर रही है। लीकेज होने पर नाली का गंदा पानी सीधे सप्लाई लाइन में मिल जाता है। बारिश के मौसम में जलभराव के कारण यह खतरा और बढ़ जाता है। इसके बावजूद न तो ड्रेनेज सिस्टम सुधारा जा रहा है और न ही जर्जर पाइपलाइन बदली जा रही है।
इंदौर से सबक नहीं, रायपुर में लापरवाही
इंदौर में पेयजल में बैक्टीरिया मिलने और जनहानि की घटनाओं के बाद वहां रोजाना 200 से 300 सैंपलों की जांच की जा रही है। इसके विपरीत रायपुर में दर्जनों शिकायतों के बावजूद न सैंपल लिए जा रहे हैं और न ही कोई रिपोर्ट सार्वजनिक की जा रही है।
600 करोड़ खर्च के बाद भी नाली का पानी
नगर निगम और स्मार्ट सिटी कंपनी ने अमृत मिशन योजना के तहत पांच वर्षों में 600 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। दावा किया गया कि 46 टंकियों में से 22 कमांड एरिया में नई पाइपलाइन बिछाई गई और 70 वार्डों की 18 से 20 लाख आबादी को शुद्ध पानी मिलेगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लीकेज की समस्या जस की तस बनी हुई है और लोगों के घरों तक दूषित पानी पहुंच रहा है।
फैक्ट फाइल
शिकायत वाले इलाके: गायत्रीनगर, कचना हाउसिंग बोर्ड, टिकरापारा, शंकरनगर
समस्या की अवधि: कई इलाकों में 3–4 सप्ताह से दूषित पानी
मुख्य आरोप: सीवर चेंबर से होकर गुजर रही पाइपलाइन, लीकेज
स्वास्थ्य पर असर: उल्टी-दस्त, बुखार, पेट दर्द
अमृत मिशन खर्च: 600 करोड़ रुपये से अधिक
सैंपलिंग स्थिति: शून्य
तुलना: इंदौर में रोज 200–300 सैंपल, रायपुर में नहीं
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