
नईदुनिया, प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी में साइबर ठगों ने रिटायर्ड वेटनरी डाक्टर को 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा कर 73 लाख ठग लिए गए। मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर ठगी की गई है। अज्ञात ठगों के खिलाफ विधानसभा थाने में अपराध दर्ज किया गया है। विधानसभा थाना क्षेत्र के स्वर्णभूमि आमासिवनी निवासी 74 वर्षीय स्वपन कुमार सेन से ठगों ने वॉट्सएप काल के जरिए ’डिजिटल अरेस्ट’ रखा गया।
पुलिस के अनुसार, 31 दिसंबर को दोपहर करीब 12.15 बजे स्वपन सेन के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से वॉट्सएप काल आया। फोन करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और कहा कि उनके खिलाफ क्रेडिट कार्ड से धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज है। विश्वास दिलाने के लिए ठग ने एक फर्जी एफआइआर भी वाट्सएप पर भेजी। इसके बाद आरोपित ने बैंक खाता और एफडी से जुड़ी जानकारी मांगी, जिसे पीड़ित ने डर के कारण साझा कर दिया।
इसके बाद ठगों ने अलग-अलग तारीखों में रकम ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया। तीन जनवरी को आरटीजीएस के माध्यम से 34 लाख रुपये, 13 जनवरी को 39 लाख रुपए और 16 जनवरी को एफडी तुड़वाकर 55 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराए गए। सूचना मिलते ही पुलिस ने 55 लाख रुपये होल्ड करवा दिए। कुछ दिनों बाद जब पीड़ित को पूरे मामले पर संदेह हुआ, तब उन्होंने विधानसभा थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
-सरकारी अफसर बनकर काल: ठग वाट्सएप/वीडियो काल कर खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच, सीबीआइ, ईडी या पुलिस अधिकारी बताते हैं।
-फर्जी एफआइआर या नोटिस भेजना: पीड़ित को डराने के लिए वाट्सएप पर फर्जी एफआइआर, समन या कोर्ट नोटिस भेजा जाता है।
-गंभीर आरोप लगाना: कहा जाता है कि आपके नाम से क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, मनी लांड्रिंग या आतंकी फंडिंग हुई है।
-डिजिटल अरेस्ट का डर: ठग कहते हैं कि आप डिजिटल अरेस्ट हैं, कैमरा आन रखें, किसी से बात न करें, वरना तुरंत गिरफ्तारी होगी।
-बैंक और एफडी की जानकारी लेना: खाते, एफडी, बैलेंस, यूपीआइ की जानकारी मांगी जाती है।
-पैसा ट्रांसफर कराने का दबाव: कहा जाता है कि जांच के लिए रकम सुरक्षित खाते में जमा करनी होगी और आरटीजीएस/यूपीआइ से पैसा ट्रांसफर करा लिया जाता है।
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- पुलिस या जांच एजेंसी फोन या वाट्सएप पर गिरफ्तारी नहीं करती।
- पुलिस, ईडी, सीबीआइ कभी भी पैसा ट्रांसफर करने को नहीं कहती।
- वाट्सएप पर भेजी गई एफआइआर या नोटिस पर तुरंत विश्वास न करें।
- डराने वाली बात हो तो काल तुरंत काट दें और नंबर ब्लाक करें।
- अकेले निर्णय न लें, किसी भरोसेमंद व्यक्ति से तुरंत बात करें।
- शक होते ही बैंक से संपर्क कर खाता, यूपीआइ और एफडी सुरक्षित कराएं।
- 1930 पर काल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।