
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ के माओवादी हिंसा प्रभावित बीजापुर जिला से बड़ी खबर सामने आई है। जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ को लेकर तेलंगाना भाजपा ने बड़ा दावा किया है। भाजपा की तेलंगाना इकाई ने इंटरनेट मीडिया एक्स पर कहा है कि इस मुठभेड़ में माओवादियों का शीर्ष कमांडर पापाराव उर्फ मोंगू मारा गया है। हालांकि, छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
संयुक्त सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए माओवादी हिंसा विरोधी अभियान के दौरान अब तक छह माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं। मुठभेड़ स्थल से दो एके-47 राइफलें और भारी मात्रा में विस्फोटक भी मिले हैं। मारे गए माओवादियों में चार की पहचान हो चुकी है, जिन पर बीस लाख रुपये का इनाम घोषित था। शेष दो माओवादियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
पापाराव 50 लाख का इनामी, दंतेवाड़ा हमले का आरोपित
पापाराव मूल रूप से तेलंगाना के जगतियाल जिले का रहने वाला था और पिछले करीब दो दशकों से बस्तर के जंगलों में सक्रिय था। वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य था और माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल था। उस पर 50 लाख रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। पापाराव का नाम वर्ष 2010 के दंतेवाड़ा हमले से भी जुड़ा रहा है, जिसमें सीआरपीएफ के 76 जवान बलिदान हुए थे। बीते वर्ष नवंबर में एक मुठभेड़ के दौरान उसकी पत्नी उर्मिला भी मारी गई थी।
कैसे हुई मुठभेड़
सुरक्षाबलों को खुफिया सूचना मिली थी कि बीजापुर के नेशनल पार्क क्षेत्र में बड़ी संख्या में सशस्त्र माओवादी मौजूद हैं। इसके बाद जिला रिजर्व गार्ड और अन्य संयुक्त बलों ने इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इसी दौरान माओवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ हुई। कई घंटे चली इस कार्रवाई में छह माओवादी मारे गए।
एक साल में माओवाद पर सबसे बड़ा प्रहार
पिछले एक वर्ष में छत्तीसगढ़ में माओवाद के खिलाफ अभियान निर्णायक मोड़ पर पहुंचा है। केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य के तहत बस्तर संभाग में लगातार सफलताएं मिल रही हैं।
250 से 300 से अधिक माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बीते एक साल में 250 से 300 से अधिक माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं, जो पिछले एक दशक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। इसी अवधि में सरकार की पुनर्वास नीति और लोन वर्राटू अभियान के तहत 1500 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। वहीं, करीब 800 से अधिक सक्रिय माओवादियों और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पापाराव के मारे जाने की पुष्टि होती है, तो यह माओवादी संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा रणनीतिक और मानसिक झटका होगा।
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