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किशोरी के यौन शोषण से जन्मे बच्चे का 'अवैध सौदा', फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने वाले दंपति गिरफ्तार, डॉक्टर फरार

Rajnandgaon News: किशोरी के यौन शोषण से जन्मे शिशु को अवैध रूप से अपना बच्चा बताकर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के गंभीर मामले में पुलिस ने एक दंपति को गिर...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 11 Jan 2026 08:57:59 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Jan 2026 08:57:59 PM (IST)
किशोरी के यौन शोषण से जन्मे बच्चे का 'अवैध सौदा', फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने वाले दंपति गिरफ्तार, डॉक्टर फरार
किशोरी के यौन शोषण से जन्मे बच्चे का 'अवैध सौदा'।

HighLights

  1. कुमुद मोहबे अस्पताल का डॉक्टर मास्टरमाइंड
  2. नियमों को ताक पर रखकर करवाई डिलीवरी
  3. फिर अवैध रूप से दूसरे को सौंप दिया बच्चा

नईदुनिया प्रतिनिधि, राजनांदगांव। किशोरी के यौन शोषण से जन्मे शिशु को अवैध रूप से अपना बच्चा बताकर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के गंभीर मामले में पुलिस ने एक दंपति को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने नवजात को बरामद कर विधिक संरक्षण के लिए बाल विकास समिति को सौंप दिया है। आरोपित दंपती को न्यायालय में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। इस प्रकरण में कुमुद मोहबे मेमोरियल अस्पताल के डॉ. विजय फरार हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने ही स्टाफ के साथ मिलकर इस अवैध कागज तैयार करवाए और बच्चे को भिलाई के दंपति को सौंप दिया।

क्या है पूरा मामला?

मामले की शुरुआत तब हुई जब पीड़िता की मां ने चौकी चिचोला में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में बताया गया कि उसकी बेटी के साथ गांव के ही एक लड़के ने बहला-फुसलाकर शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती हो गई। लोकलाज के भय से तत्काल रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। गर्भावस्था के दौरान बेटी को रिश्तेदार के घर रखा गया, जहां बच्चे का जन्म हुआ। इसके बाद पीड़िता के चाचा-चाची ने नवजात को एक जरूरतमंद दंपति को सौंप दिया।


पूर्व में पीड़िता के यौन शोषण के मामले में विधि से संघर्षरत बालक को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा चुका है। अग्रिम विवेचना में सामने आया कि पीड़िता के स्वजन बच्चे को अपने पास नहीं रखना चाहते थे, जिसके चलते जन्म के तुरंत बाद उसे एक दंपति को दे दिया गया। प्रकरण में बीएनएस की धारा 62(1), 337, 338, 339, पाक्सो एक्ट की धारा 21 तथा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 80 जोड़ी गई है।

अस्पताल में मिलीभगत

इस प्रकरण का मास्टरमाइंड डॉ. विजय को बताया जा रहा है। वह कुमुद मोहबे अस्पताल के अलावा एक अन्य निजी अस्पताल में कार्यरत है। उसने पहले किशोरी की नियम विरुद्ध डिलीवरी करवाई और फिर नवजात को अस्पताल में भर्ती करवाया। दंपति ने शिशु को इलाज के नाम पर कुमुद मोहबे मेमोरियल अस्पताल में स्वयं का बच्चा बताया। डॉ. विजय और स्टाफ की मिलीभगत से नगर निगम को गलत जानकारी भेजी गई, जिसके आधार पर नवजात का जन्म प्रमाण पत्र जारी हो गया। मामला सामने आने के बाद से डॉ. विजय फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।

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कर्मचारियों पर भी संदेह, रैकेट का अंदेशा

इस पूरे मामले में कुमुद मोहबे अस्पताल के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस की नजर अस्पतालों के उन लोगों पर भी है जो इस तरह के मामलों में नवजात के अवैध दस्तावेज तैयार कर उन्हें दूसरे दंपतियों को सौंप देते हैं। आशंका है कि इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से जारी है। वहीं प्रकरण में कुमुद मोहबे अस्पताल द्वारा भी अवैध तरीके से दस्तावेज तैयार करवाए जाने को लेकर सिटी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई है। इधर, पुलिस ने कुमुद मेमोरियल अस्पताल से संबंधित दस्तावेज व अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य संकलित किए हैं।