गांव तक सड़क, हर घर पानी, चौक पर हाई मास्क लाइट... अब 'हिड़मा' नहीं, छत्तीसगढ़ के पूर्वर्ती गांव की नई पहचान बना विकास
सुकमा जिले का पूर्वर्ती गांव, जो वर्षों तक माओवादी दहशत और सरकारी पहुंच से दूर रहा, अब तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। कभी जहां हिड़मा के नाम ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 19 Nov 2025 05:50:30 PM (IST)Updated Date: Wed, 19 Nov 2025 05:54:31 PM (IST)
हिड़मा के नाम से बदनाम पूर्वर्ती गांव अब सड़क, पानी, बिजली से चमक उठा।HighLights
- हर घर तक नल कनेक्शन पहुंचा।
- चौक में हाई मास्क लाइट स्थापित।
- आंगनबाड़ी और सड़क निर्माण कार्य पूरा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, सुकमा: चार दशक से माओवाद का दंश झेल रहा पूर्वर्ती की तस्वीर अब बदल रही है। जिस गांव में प्रशासन तो दूर की बात है आम आदमी के आने की अनुमति नहीं थी, उस गांव में अब शिविरों का आयोजन हो रहा है जिस पर ग्रामीण विश्वास जता रहे है। अंधकार में डुबा गांव जहां तक पहुंचने की सड़क नहीं थी। अब हालत बदल रहे है। माओवाद रूपी अंधकार अब विकास की रोशनी से चमक रहा है।
खूंखार माओवादी माड़वी हिड़मा जिसके कारण पूर्वर्ती गांव विकास से कोसो दूर था। लेकिन उसी का भतीजा माड़वी हिड़मा जो यह मानते है कि एक साल से गांव में विकास तेजी से हो रहा है। जगरगुंडा से करीब 20 किमी दूर स्थित पूर्वर्ती गांव जहां जाने की अनुमति बहुत कम लोगों को मिलती थी। बीच में माओवादियों की नाकेबंदी थी जिसके कारण प्रशासन वहा तक नहीं पहुंच पाया था। लेकिन बीते एक साल में गांव की तस्वीर बदलने लगी है।
कैंप से खुले विकास के रास्ते
एक साल पहले गांव के करीब सुरक्षा बलों का कैंप खुला। जिसके बाद धीरे धीरे विकास की रफ्तार तेज हुई। गांव तक सड़क का निर्माण हुआ। साथ ही बच्चों के लिए आंगनबाड़ी भवन बनाया गया। यहां तक कि हर घर में नल कनेक्शन लगा दिया गया, कुछ में शुद्ध पानी आ रहा है। बीच चौक में लगी हाई मास्क पूरे गांव को रोशन करती है वहीं बिजली के लगे खंभे ग्रामीणों के जीवन का अंधेरा दूर करेगी।
प्रशासन पर बढ़ा भरोसा
पूर्वर्ती गांव जहां के ग्रामीण प्रशासन और पुलिस को गांव छोड़कर भाग जाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। गांव में लगे शिविर में सभी ग्रामीण पहुंच रहे है। और अपनी समस्याओं से अवगत करा रहे है। साथ ही ग्रामीणों का आधार कार्ड बनाया जा रहा है साथ ही शासन की योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।