
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने चालू शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा और दूरगामी कदम उठाते हुए कक्षा तीसरी से आठवीं तक कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नया पाठ्यक्रम लागू कर दिया है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 20 घंटे का विशेष माड्यूल भी तैयार किया गया है।
इसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई, आइआइटी जोधपुर और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के विशेषज्ञों ने मिलकर तैयार किया है। इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही कोडिंग, डेटा साइंस व आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ना है।
कक्षा तीसरी से पांचवीं तक एआई को कोई अलग विषय नहीं बनाया गया है, बल्कि इसे गणित व आसपास की दुनिया जैसे विषयों संग जोड़ा गया है। बच्चों को खेल, पहेलियों और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से यह शिक्षा दी जाएगी, जिसके लिए साल भर में लगभग पचास घंटे तय किए गए हैं। वहीं कंप्यूटेशनल थिंकिंग का अर्थ किसी बड़े सवाल या समस्या को छोटे-छोटे चरणों में बांटकर हल करने की कला से है, जैसे गणित के सवालों को सरल चरणों में हल करना।
इस पाठ्यक्रम के तहत छात्रों को तीन प्रमुख बातें सिखाई जाएंगी। पहली, गणित के सवालों को छोटे चरणों में हल करने का अभ्यास, दूसरी, एआइ की कार्यप्रणाली, डेटा का उपयोग और उसका दैनिक जीवन में इस्तेमाल, और तीसरी, एआई से बनने वाली गलत जानकारी या भ्रामक खबरों की पहचान करना।
इस पूरी योजना को सफल बनाने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। एआई के कांसेप्ट को गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और भाषाओं जैसे विषयों में भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, इस सत्र से सीबीएसई ने कौशल बोध (कक्षा 6-8), कौशल विकास (कक्षा 9), डेटा साइंस और डिजाइन थिंकिंग (कक्षा 10-12) तथा सूचना प्रौद्योगिकी जैसे व्यावसायिक और कौशल आधारित विषय भी शुरू किए हैं।
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कक्षा नौवीं से बारहवीं के लिए बनाए गए बीस घंटे के इस माड्यूल की कोई अलग या बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह से विद्यालय स्तर पर ही किया जाएगा। कक्षा नौवीं के छात्रों के लिए यह माड्यूल अनिवार्य किया गया है, जबकि इंटरनेट या कंप्यूटर की कमी वाले दूरदराज के स्कूलों में शिक्षक इसे अनप्लग मोड यानी कागज और समूह चर्चा के माध्यम से भी पढ़ा सकेंगे।
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