
भरत मानधन्या, नईदुनिया, इंदौर। गणित की किताब में जब तक संख्याओं का उपयोग किया जाता है, तब तक बच्चों को सवाल आसान लगता है। मगर जैसे ही इन्हीं सवालों में एक्स और वाय जैसे बीजगणितीय सूत्रों का उपयोग किया जाता है, कई बच्चे उलझने लगते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि एक्स क्या है, इसका जवाब कैसे मिलेगा और इसे यहां क्यों लिखा गया है। यही परेशानी आगे चलकर बीजगणित और गणित के दूसरे कठिन सवालों में भी दिखाई देती है।
इन्हीं सवालों का जवाब आईआईएम इंदौर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आदित्य माहेश्वरी ने अपनी रिसर्च में दिया है। इसमें उन्होंने भारतीय न्याय दर्शन की तर्क और कारण समझाने वाली पद्धति को गणित की पढ़ाई से जोड़ने की बात कही है। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल उत्तर याद कराना नहीं, बल्कि यह समझाना है कि उत्तर आया कैसे और किसी कदम को उठाने की जरूरत क्यों पड़ी।
डॉ. आदित्य माहेश्वरी के अनुसार, बच्चे जब पहली बार गणित सीखते हैं तो वे चीजों को गिनकर संख्या समझते हैं। दो किताबें हैं तो दो, तीन पेंसिल हैं तो तीन और पांच गेंदें हैं तो पांच। इस तरह उनके लिए संख्याओं को समझना आसान होता है, लेकिन जैसे-जैसे कक्षा आगे बढ़ती है।
बीजगणित से जुड़े सवाल आने लगते हैं, जिसमें एक्स और वाय जैसे अक्षर आने लगते हैं। बच्चे के लिए यह बदलाव अचानक होता है। उसे लगता है कि गणित में कोई नई और मुश्किल चीज आ गई है, जबकि असल में एक्स कोई अलग तरह की चीज नहीं है। यह सिर्फ उस संख्या का नाम है, जिसका मान हमें अभी पता नहीं है।
गणित की पढ़ाई में अक्सर बच्चों को नियम और फार्मूले याद करने पड़ते हैं। कई बार वे सवाल हल करने का तरीका भी याद कर लेते हैं, लेकिन यह नहीं समझते कि वह तरीका काम क्यों करता है। रिसर्च में इसी समस्या पर ध्यान दिया गया है।
इसमें कहा गया है कि बच्चे को सवाल हल करते समय हर कदम के पीछे का कारण भी समझना चाहिए। मसलन, शिक्षक अगर बोर्ड पर किसी समीकरण को हल कर रहे हैं तो सिर्फ एक के बाद एक चरण लिखने के बजाय यह भी बता सकते हैं कि अगला कदम क्यों उठाया जा रहा है। इससे बच्चे को पूरा तरीका समझने में मदद मिलेगी।
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न्याय दर्शन में किसी बात को सही मानने से पहले उसके पीछे का कारण और तर्क समझने पर जोर दिया जाता है। यानी किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए यह देखना जरूरी है कि उसके पीछे क्या वजह है और बात किस तरह साबित होती है।
रिसर्च में इसी सोच को गणित की पढ़ाई से जोड़ने की बात कही गई है। गणित में भी किसी सवाल का जवाब देने के साथ यह समझना जरूरी है कि वह जवाब सही क्यों है। इस तरीके से बच्चे को सिर्फ यह नहीं बताया जाएगा कि उत्तर पांच है, बल्कि यह भी समझाया जाएगा कि दो और तीन को जोड़ने पर पांच क्यों आया।
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बीजगणित और प्रमाण वाले सवालों में बच्चों में परेशानी ज्यादा दिखाई दे सकती है। तर्क और कारण पर आधारित तरीका इस दूरी को कम करने में मदद कर सकता है। जब बच्चे को पता होगा कि सवाल में कौन-सा कदम क्यों उठाया जा रहा है तो उसके लिए पूरी प्रक्रिया समझना आसान हो सकता है। रिसर्च का उद्देश्य गणित पढ़ाने के मौजूदा तरीकों को हटाना नहीं है। न्याय दर्शन को एक अतिरिक्त और मददगार तरीका बनाना है। - डॉ. आदित्य माहेश्वरी, एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईएम इंदौर