• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • चुनाव
  • बिहार विधान सभा

Bihar Chunav 2025: टिकट कटने पर बागी नेताओं ने बदले चुनावी समीकरण, निर्दलीयों ने दलीय उम्मीदवारों की बढ़ाईं मुश्किलें

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Elections 2025) के रण में टिकट कटने से नाराज कई दिग्गज नेताओं ने बागी तेवर अपना कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sat, 25 Oct 2025 04:55:02 PM (IST)Updated Date: Sat, 25 Oct 2025 05:00:42 PM (IST)
Bihar Chunav 2025: टिकट कटने पर बागी नेताओं ने बदले चुनावी समीकरण, निर्दलीयों ने दलीय उम्मीदवारों की बढ़ाईं मुश्किलें
Bihar Elections 2025: टिकट कटने पर कई नेता निर्दलीय चुनाव लड़ रहे।

HighLights

  1. टिकट कटने पर कई नेता निर्दलीय चुनाव लड़ रहे।
  2. गोपाल मंडल ने गोपालपुर से निर्दलीय नामांकन भरा।
  3. रितु जायसवाल परिहार से स्वतंत्र उम्मीदवार बनीं।

डिजिटल डेस्क: बिहार के चुनावी मैदान (Bihar Elections 2025) में इस बार ‘बागी’ उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या ने सियासी धुंध और बढ़ा दी है। टिकट कटने के बाद हारे या किनारे किए गए कई अनुभवी नेता अब निर्दलीय होकर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिससे पारम्परिक दलीय उम्मीदवारों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। गोपाल मंडल, जय कुमार सिंह, रितु जायसवाल और मोहम्मद इरफान आलम जैसे नाम इस बागी लहर के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हैं।

इन सीटों पर घमासान

भागलपुर जिले की गोपालपुर सीट पर जदयू के चार बार विधायक रहे गोपाल मंडल को इस बार पार्टी ने टिकट नहीं दिया और शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल को प्रत्याशी बनाया गया। नाराज गोपाल मंडल ने बगावत का रास्ता अपनाते हुए निर्दलीय नामांकन करा लिया है। उनके बागी कदम ने जदयू के अधिकृत प्रत्याशी के सामने चुनौती पैदा कर दी है और इलाके में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।


रोहतास की दिनारा सीट पर भी ऐतिहासिक विवाद देखने को मिल रहा है। सीट एनडीए-सम्बन्धी सीट-शेयरिंग के कारण राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के खाते में गई, जबकि जदयू के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री जय कुमार सिंह को इंतजार रह गया। टिकट न मिलने से आहत जय कुमार सिंह ने निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया और दिनारा की लड़ाई और भी संगीन हो गई है।

सीतामढ़ी की परिहार सीट पर रितु जायसवाल, जो ग्राम पंचायत से उठ कर लोकप्रिय चेहरा बन चुकी हैं, राजद में टिकट न मिलने पर बागी हो गईं और परिहार से स्वतंत्र रूप से मैदान में हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने परिवारवादी राजनीति को तरजीह दी जबकि वे सीधे जनता के बीच जाकर अपनी जीत की लड़ाई लड़ना चाहती हैं। उनकी भावनात्मक अपील ने स्थानीय स्तर पर समर्थन जुटाया है।

यह भी पढ़ें- Bihar Politics: बिहार की सियासत में इन ’Hot Seats' पर टिकीं नजरें... चौंका सकता है रिजल्ट, ये सात सीटें तय करेंगी सत्ता की दिशा!

ऐसी ही कई और घटनाएं भी रिपोर्ट की जा रही हैं कुछ दागी या अनुभवी नेताओं के टिकट कटने के बाद उन्होंने अपना दर्जा जनता के पास परखा। कांग्रेस के कुछ पुराने विधायक और राजद के समीपस्थ स्थानीय नेता भी बागी तेवर अपना रहे हैं। मीडिया कवरेज में यह भी बताया गया है कि राज्य भर में दर्जन भर से अधिक निर्दलीय उम्मीदवार ऐसे हैं जिनका असर दलीय वोटों पर पड़ सकता है।

क्या कहते हैं पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स?

विश्लेषकों का कहना है कि बागी उम्मीदवार खासकर उन सीटों पर निर्णायक साबित हो सकते हैं जहां चुनाव पहले से कड़ा है। निर्दलीय होने पर ये नेता अक्सर अपने व्यक्तिगत वोट बैंक के बूते मुकाबला कर देते हैं, जिससे दलीय उम्मीदवारों के वोट बंटते हैं और परिणाम अप्रत्याशित बनते हैं। राजनीतिक दलों के लिए यह चुनौती है कि वे अपने रणनीतिक समीकरण और कार्यकर्ताओं की नाखुशी को कैसे नियंत्रित करें ताकि गठबंधन या पार्टी की समग्र स्थिति पर बुरा असर न पड़े।

यह भी पढ़ें- Chhath Puja 2025: विदेशों में ऐसे मनाया गया बिहार का पावन छठ पर्व, ‘जय छठी मइया’ की गूंज से गूंजा आसमान

पार्टी नेतृत्व की ओर से बागियों को मनाने और स्थानीय समस्याओं का हल करने के प्रयास जारी हैं, पर फिलहाल चुनावी रणभूमि में ये बागी चेहरे वोट की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं और कई सीटें रोमांचक और अनिश्चित बनी हुई हैं।