
MP Politics इंदौर, इलेक्शन डेस्क। मध्य प्रदेश में 2003 में भाजपा सरकार आने के बाद आज तक कांग्रेस का वनवास खत्म नहीं हुआ है। 2018 में जरूर कांग्रेस की सरकार बनी थी, लेकिन डेढ़ साल भी सरकार नहीं चल पाई और भाजपा की सरकार बन गई।
हालांकि कांग्रेस के बुरे दिन 2003 के बाद से ही शुरू हो गए थे, जब प्रदेश में भाजपा ने अपनी स्वायत्ता कायम कर ली और जिस भी सरकारी नुमाइंदे ने कांग्रेस की ओर झुकाव दिखाया वह हाशिए पर चला गया। एक ऐसा ही देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से जुड़ा है, जब तत्कालीन कुलपति को राहुल गांधी को आमंत्रित करने के कारण अपना पद गंवाना पड़ा था। 'नईदुनिया' की स्पेशल सीरीज 'किस्सा कुछ यूं था' में उक्त किस्सा बताते हैं।
दरअसल, ये वो दौर था जब प्रदेश में भाजपा सरकार थी और भाजपा कांग्रेस को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी। बात साल 2009 की है, उस समय देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजीत सिंह सेहरावत थे। उस समय उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक कार्यक्रम में आमंत्रित कर लिया था।
जिसके बाद राहुल गांधी जब इंदौर पहुंचे तो उन्होंने बकायदा विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में छात्रों के कार्यक्रम को सम्बोधित किया था। इस कार्यक्रम के बाद सरकार ने कुलपति अजीत सिंह सेहरावत किो नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।
सरकार की ओर से नोटिस मिलने के बाद सेहरावत नाराज हो गए और उन्होंने इस्तीफा दे दिया। जिसमें उन्होने कहा कि ‘शाहरुख को बुलाओ तो कोई नहीं पूछेगा, राहुल गांधी को बुलाया तो नोटिस।’
इस पूरे विवाद के बाद भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने सेहरावत द्वारा लिखी गई बातों का खंडन किया। विजयवर्गीय ने दावा किया कि सेहरावत ने विश्वविद्यालय में गुटबाजी और अनियमितताओं के चलते इस्तीफा दिया था।
(Source: नईदुनिया नेटवर्क की पुरानी खबरों एवं मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार दीपक तिवारी की किताब राजनीतिनामा मध्यप्रदेश 2003-2018 (भाजपा युग) से साभार)