• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मनोरंजन

नाना पाटेकर ने सिनेमा के पर्दे पर राज किया, लेकिन महाराष्ट्र के किसानों के लिए थी उनकी असली लड़ाई, किसान की विधवा ने बदला था नजरिया

पानी बचाने और गांवों की भलाई के लिए उनकी कोशिशें उनकी पब्लिक लाइफ का अहम हिस्सा बन गईं। अपने मशहूर पांच दशक के एक्टिंग करियर के साथ-साथ, पाटेकर ने अपन...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 02:31:54 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 02:42:18 PM (IST)
नाना पाटेकर ने सिनेमा के पर्दे पर राज किया, लेकिन महाराष्ट्र के किसानों के लिए थी उनकी असली लड़ाई, किसान की विधवा ने बदला था नजरिया
सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के साथ नाना पाटेकर।

HighLights

  1. सूखा प्रभावित महाराष्ट्र में किसानों की परेशानी और आत्महत्या की खबरों ने उन्हें प्रभावित किया।
  2. उसी साल सितंबर में उन्होंने एक्टर मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर नाम फाउंडेशन बनाया।
  3. सिंचाई, खेत के तालाब, नाले और नदियों को गहरा करने और ग्राउंडवॉटर रिचार्ज पर भी काम किया।

एंटरटेनमेंट डेस्‍क। लीजेंड एक्टर नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 साल की उम्र में निधन हो गया। वे अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो भारतीय सिनेमा से कहीं आगे तक फैली हुई है। नाना पाटेकर के निधन ने नाम फाउंडेशन के ज़रिए महाराष्ट्र के किसानों के साथ उनके काम पर फिर से ध्यान खींचा है।

पानी बचाने और गांवों की भलाई के लिए उनकी कोशिशें उनकी पब्लिक लाइफ का अहम हिस्सा बन गईं। अपने मशहूर पांच दशक के एक्टिंग करियर के साथ-साथ, पाटेकर ने अपनी बाद की ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित किसानों और राज्य में बढ़ते पानी के संकट को दिया।


पाटेकर की गोवा में उनके घर पर कार्डियक अरेस्ट के बाद मौत हो गई। उनकी मौत पर न सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री बल्कि पॉलिटिकल नेताओं ने भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने नाम फाउंडेशन के ज़रिए उनके सोशल काम और किसानों के साथ उनके जुड़ाव को याद किया।

किसानों की आत्‍महत्‍या की घटनाओं ने किया प्रभावित

पाटेकर के लिए टर्निंग पॉइंट 2015 में आया जब सूखा प्रभावित महाराष्ट्र में किसानों की परेशानी और आत्महत्या की खबरों ने उन्हें बहुत प्रभावित किया। उसी साल सितंबर में उन्होंने एक्टर मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर नाम फाउंडेशन को लीड किया। यह ऑर्गनाइज़ेशन बहुत ज़्यादा सूखे, पानी की कमी और खेती करने वाले समुदायों में बढ़ती परेशानी को देखते हुए बनाया गया था।

naidunia_image

नहरों से पानी शुरू करना था मकसद

नाम का काम सिर्फ़ तुरंत फाइनेंशियल मदद देने से कहीं ज़्यादा था। इसने महाराष्ट्र के पानी की कमी के लिए लंबे समय के सॉल्यूशन बनाने पर फोकस किया, जिसमें नहरों और बंद पड़े पानी के प्रोजेक्ट्स को ठीक करना, नदियों को फिर से ज़िंदा करना, पानी की जगहों से गाद निकालना और ग्राउंडवॉटर की अवेलेबिलिटी में सुधार करना शामिल था। फाउंडेशन ने सिंचाई, खेत के तालाब, नाले और नदियों को गहरा करने और ग्राउंडवॉटर रिचार्ज पर भी काम किया।

यह भी पढ़ें: नाना पाटेकर ने रात 2.30 बजे दोस्‍त को भेजा था आखिरी मैसेज, दोस्‍त ने सुबह 4 बजे देखा तो अपार्टमेंट की तरफ दौड़ा

naidunia_image

किसान की विधवा से मिली थी प्रेरणा

मई 2026 में उन्होंने नागपुर जल संवाद में बात की, जहां उन्होंने कहा कि पानी बचाने को पब्लिसिटी का काम न मानकर एक असली पब्लिक मूवमेंट बनना चाहिए। उन्होंने लोगों से पानी की हर बूंद बचाने की ज़िम्मेदारी लेने को कहा। इस इवेंट में, पाटेकर ने यह भी याद किया कि कैसे एक किसान की विधवा की बुरी हालत ने उन्हें पानी बचाने और गांव की भलाई के काम के लिए इंस्पायर किया था। इसलिए उनका कंट्रीब्यूशन सिर्फ़ चेक लिखने या किसी काम के लिए सेलिब्रिटी का स्टेटस देने तक ही सीमित नहीं था।

यह भी पढ़ें: 'उसका नाम दुर्वासा था, उसने हमारे साथ ढाई साल बिताए', जब Nana Patekar ने याद किया था बड़े पुत्र की मौत का दुखद किस्‍सा

515 नदियों, नालों पर किया काम

नाम फाउंडेशन के मुताबिक, 2015 से 2025 के बीच इसके पानी बचाने की कोशिशों से 2,246 पानी के सोर्स ठीक करने और 178 नदियों को फिर से ज़िंदा करने में मदद मिली। इसने 515 नदियों और नालों पर भी काम किया और 769 परकोलेशन टैंक ठीक किए। ऑर्गनाइज़ेशन का कहना है कि इन प्रोजेक्ट्स से 40,000 करोड़ लीटर से ज़्यादा पानी जमा करने की कैपेसिटी बनी और 77 लाख से ज़्यादा किसानों को सीधे फ़ायदा हुआ। पाटेकर अपनी ज़िंदगी के आखिरी महीनों तक पानी बचाने के बारे में पब्लिक में बोलते रहे।