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नाना पाटेकर की मौत पर दर्ज किया गया है मेडिको-लीगल केस (MLC), क्‍या होती है यह टर्म?

नाना पाटेकर को सुबह करीब 5:30 बजे मृत घोषित किया गया था। डॉ. साल्कर ने कहा, उन्हें मृत लाया गया था। पुलिस को बताना पड़ा क्योंकि एक MLC है। आइये समझते ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 03:12:01 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 03:31:00 PM (IST)
नाना पाटेकर की मौत पर दर्ज किया गया है मेडिको-लीगल केस (MLC), क्‍या होती है यह टर्म?
नाना पाटेकर मेडिको लीगल केस।

HighLights

  1. उनकी बॉडी को पोस्ट-मॉर्टम के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज भेजा गया है।
  2. जिस हॉस्पिटल में उन्हें ले जाया गया था, वहां पर उन्हें मृत लाया गया था।
  3. यह एक ऐसी कैटेगरी है जिससे रजिस्ट्रेशन अपने आप शुरू हो जाता है।

लाइफस्‍टाइल डेस्‍क। गुरुवार को गोवा में हुई मशहूर एक्टर नाना पाटेकर की मौत को मेडिको-लीगल केस (MLC) के तौर पर रजिस्टर किया गया है। उनकी बॉडी को पोस्ट-मॉर्टम के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। जिस हॉस्पिटल में उन्हें ले जाया गया था, उसका कहना है कि उन्हें मृत लाया गया था, यह एक ऐसी कैटेगरी है जिससे रजिस्ट्रेशन अपने आप शुरू हो जाता है। मणिपाल हॉस्पिटल में ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. शेखर साल्कर ने बताया कि नाना पाटेकर को सुबह करीब 5:30 बजे मृत घोषित किया गया था। डॉ. साल्कर ने कहा, उन्हें मृत लाया गया था। पुलिस को बताना पड़ा क्योंकि एक MLC है। आइये समझते हैं यह क्‍या टर्म होती है।

मेडिको-लीगल केस क्या है?

MLC एक ऐसा केस है जिसमें डॉक्टर मेडिकल और लीगल दोनों पहलुओं को देखता है और पुलिस को सूचित किया जाना चाहिए। हॉस्पिटल की गाइडलाइंस में ऐसी मौतें शामिल हैं जहां व्यक्ति को मृत अवस्था में लाया जाता है, या किसी अनजान कारण से कोमा में या बेहोशी की हालत में पहुंचाया जाता है।


ऐसे मामलों में हॉस्पिटल अपने MLC रजिस्टर में केस दर्ज करता है और सबसे पास के पुलिस स्टेशन को इन्फॉर्म करता है, और परिवार की सहमति की ज़रूरत नहीं होती। रजिस्ट्रेशन हॉस्पिटल की एक प्रोसीजरल ज़रूरत है। डॉ. साल्कर ने पुलिस को दी गई जानकारी को इन्हीं शब्दों में बताया। यह इस बारे में कोई फाइंडिंग नहीं है कि किसी व्यक्ति की मौत कैसे या क्यों हुई।

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MLC प्रोटोकॉल में मौत का कारण सर्टिफाइड नहीं किया जाता

पुलिस को इन्फॉर्म किया जाता है और जांच की जाती है। गोवा मेडिकल कॉलेज में पोस्टमॉर्टम का मकसद मौत का कारण पता लगाना है। हॉस्पिटल MLC प्रोटोकॉल के तहत, तब तक मौत का कारण सर्टिफाइड नहीं किया जाता है। डॉक्टर प्रिजर्व्ड सैंपल पर आगे के टेस्ट का ऑर्डर दे सकते हैं, जिससे पोस्टमॉर्टम के दिन के बाद फाइनल ओपिनियन में देरी हो सकती है। फॉर्मैलिटीज़ के बाद बॉडी परिवार को दे दी जाती है।

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नाना ने दोस्‍त को रात में ही भेजा था मैसेज

डॉ. साल्कर ने कहा कि, जहां तक ​​हॉस्पिटल को याद है, पाटेकर ने सुबह करीब 2:30 बजे एक दोस्त को मैसेज किया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। दोस्त ने रात में मैसेज नहीं देखा और उसे कॉल किया। दोस्त सुबह करीब 4 बजे उसके घर पहुंचा। तब तक, डॉ. साल्कर के मुताबिक, एक्टर को पसीना आ रहा था और वह धीरे-धीरे बेहोश हो रहा था। एक केयरटेकर को हॉस्पिटल भेजा गया और वह मणिपाल एम्बुलेंस से लौटा।

हॉस्पिटल की इमरजेंसी टीम ने पाया कि पाटेकर “बिल्कुल बेहोश” थे और उन्होंने कार्डियक मसाज शुरू कर दी। उन्हें सुबह करीब 4:20 या 4:30 बजे हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉ. साल्कर ने कहा कि कार्डियक मसाज “लगभग 45 मिनट से एक घंटे” तक बिना किसी सफलता के चलती रही। उन्होंने कहा कि दोस्त और एक केयरटेकर पाटेकर के साथ थे, और उनका परिवार वहां नहीं था।

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नाना पाटेकर का जीवन एक नजर में

नाना पाटेकर का जन्म विश्वनाथ पाटेकर के नाम से हुआ था, 75 साल के थे, हिंदी और मराठी सिनेमा के सबसे मशहूर एक्टर्स में से एक थे, जिन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स, पद्म श्री (2013) और परिंदा और क्रांतिवीर से लेकर वेलकम और द वैक्सीन वॉर तक कई रोल मिले। उन्होंने नाम फाउंडेशन के ज़रिए किसानों के परिवारों के साथ भी काम किया।