Climate Anxiety: बच्चे पैदा करने से डर रहीं महिलाएं... जानें क्या है इस एंग्जायटी की वजह
ग्लोबल वॉर्मिंग, पिघलते ग्लेशियर और बेमौसम आती प्राकृतिक आपदाएं अब केवल वैज्ञानिक चर्चा का विषय नहीं रही हैं। ये हमारे व्यक्तिगत जीवन और मानसिक स्वास् ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 14 Jan 2026 08:01:14 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Jan 2026 08:01:14 PM (IST)
Climate Anxiety: बच्चे पैदा करने से डर रहीं महिलाएंलाइफस्टाइल डेस्क। ग्लोबल वॉर्मिंग, पिघलते ग्लेशियर और बेमौसम आती प्राकृतिक आपदाएं अब केवल वैज्ञानिक चर्चा का विषय नहीं रही हैं। ये हमारे व्यक्तिगत जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित कर रही हैं। हाल के वर्षों में एक नई मानसिक स्थिति उभरकर सामने आई है, जिसे ‘क्लाइमेट एंग्जायटी’ (Climate Anxiety) या 'इको-एंग्जायटी' कहा जा रहा है। इसका सबसे बड़ा और चौंकाने वाला असर महिलाओं के 'फैमिली प्लानिंग' संबंधी फैसलों पर दिख रहा है।
क्या है क्लाइमेट एंग्जायटी?
यह आने वाले पर्यावरणीय विनाश के डर से पैदा होने वाली एक गहरी और निरंतर बनी रहने वाली मानसिक बेचैनी है।
- अस्तित्व का डर: यह केवल सामान्य चिंता नहीं है, बल्कि एक ऐसा डर है कि भविष्य में पृथ्वी रहने लायक नहीं बचेगी।
- APA की रिपोर्ट: अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार, उन लोगों में यह चिंता अधिक है जो माता-पिता बनने की दहलीज पर हैं। उन्हें डर है कि उनके बच्चे एक ऐसे संसार में आएंगे जहाँ शुद्ध हवा, पानी और सुरक्षित वातावरण का अभाव होगा।
निःसंतान रहने के फैसले के पीछे 3 बड़े कारण
ब्रिटेन और दुनिया के अन्य हिस्सों में हुई रिसर्च के अनुसार, क्लाइमेट एंग्जायटी महिलाओं को मातृत्व से दूर कर रही है...
- भविष्य की अनिश्चितता: महिलाओं को लगता है कि संकटों से घिरी दुनिया में नए जीवन को लाना उसके साथ 'अन्याय' होगा। इस डर के कारण कई महिलाओं ने गर्भधारण न करने या गर्भपात जैसे कठोर निर्णय तक लिए हैं।
- संसाधनों की कमी का भय: लगातार बढ़ते तापमान और प्राकृतिक आपदाओं के कारण महिलाओं में यह घबराहट है कि वे अपने बच्चे को बेहतर पालन-पोषण और जरूरी संसाधन (जैसे भोजन और स्वच्छ पानी) दे पाएंगी या नहीं।
- सामाजिक अलगाव: 18 से 65 वर्ष की महिलाओं में इस चिंता के कारण अकेलापन बढ़ रहा है। उनकी पर्यावरणीय चिंताएं समाज की सामान्य जीवनशैली से मेल नहीं खातीं, जिससे वे खुद को अलग-थलग महसूस करती हैं।
कैसे पाएं इस मानसिक डर से निजात?
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क्लाइमेट एंग्जायटी से उबरने के लिए विशेषज्ञ कुछ प्रभावी तरीके सुझाते हैं...
- एक्शन में बदलें चिंता: पर्यावरण सुधार के लिए काम करने वाले समूहों से जुड़ें। जब आप छोटे बदलाव (जैसे रिसाइकलिंग या पौधारोपण) करते हैं, तो 'डर' की भावना 'सकारात्मक बदलाव' में बदल जाती है।
- प्रोफेशनल काउंसलिंग: यदि चिंता दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है, तो साइकोथेरेपी या विशेषज्ञ की मदद जरूर लें।
- वर्तमान पर ध्यान: भविष्य की अज्ञात आपदाओं के बजाय वर्तमान की खुशियों और सकारात्मक बदलावों पर ध्यान केंद्रित करें।
- स्वयं के प्रति दयालुता: यह याद रखें कि पूरी दुनिया को बचाने की जिम्मेदारी अकेले आपकी नहीं है। 'इको-गिल्ट' से बचें।
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