
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। आजकल कम उम्र में भी डायबिटीज का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में गर्दन पर कालापन या त्वचा का मोटा होना जैसे बदलावों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। खासकर युवाओं में ये संकेत इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़े हो सकते हैं, जो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ाता है।
हालांकि, केवल त्वचा में बदलाव के आधार पर डायबिटीज की पुष्टि नहीं की जा सकती, लेकिन समय रहते जांच कराकर खतरे को पहचानना जरूरी है। गर्दन के पीछे, बगल या शरीर की त्वचा की सिलवटों में कालापन और मोटापन होने की स्थिति को एकैंथोसिस निग्रिकन्स कहते हैं।
यह समस्या अक्सर इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्दन पर लगातार बढ़ते कालेपन या त्वचा में असामान्य बदलाव की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
अधिक वजन, परिवार में डायबिटीज का इतिहास, बार-बार प्यास लगना, पेशाब आना और बिना वजह थकान जैसे लक्षण होने पर ब्लड शुगर की जांच कराना और भी जरूरी है।
समय पर पहचान, संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और जरूरत के अनुसार उपचार से डायबिटीज के खतरे को कम करने या ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
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गर्दन पर कालापन और मोटी त्वचा: गर्दन के पीछे या किनारों पर त्वचा का गहरा, मोटा और मखमली होना इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है। इसे एकैंथोसिस निग्रिकन्स कहते हैं।
चेहरे पर बार-बार फंगल संक्रमण: त्वचा में बार-बार संक्रमण होना अनियंत्रित ब्लड शुगर से जुड़ा हो सकता है, हालांकि इसके दूसरे कारण भी होते हैं।
चेहरे की त्वचा पर घाव देर से भरना: त्वचा पर कटने या चोट लगने के बाद घाव भरने में अधिक समय लगना डायबिटीज का संकेत हो सकता है।
आंखों के आसपास पीले धब्बे: पलकों के आसपास पीले रंग के उभरे धब्बे रक्त में कोलेस्ट्राल या अन्य वसा बढ़ने से जुड़े हो सकते हैं। यह डायबिटीज का विशिष्ट लक्षण नहीं है।
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चेहरे और गर्दन के आसपास काले धब्बे होने लगते हैं। कई बार ऐसा लगता है कि मैल जमा हुआ है, लेकिन यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है।
राजेश वर्मा, हार्मोन रोग एवं थायराइड विशेषज्ञ
गले के पीछे अगर पिग्मेंटेशन हो तो उसे नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए। जितनी जल्दी हो इसकी रोकथाम के कदम उठाने चाहिए। वरना आगे चलकर डायबिटीज की बीमारी हो सकती है।
संदीप जुल्का, हार्मोन रोग एवं थायराइड विशेषज्ञ