
लाइफस्टाइल डेस्क। भारतीय व्यंजनों की बात चलते ही अक्सर हमारा ध्यान मसालेदार करी या ऑयली फूड की ओर जाता है, लेकिन 'धान के कटोरे' के नाम से मशहूर छत्तीसगढ़ में स्वाद की एक अलग ही परिभाषा है। यहां के व्यंजनों का आधार मुख्य रूप से चावल, दाल और हरी सब्जियां हैं, जिन्हें कम तेल और मसालों के साथ बेहद स्वास्थ्यवर्धक तरीके से बनाया जाता है।
छत्तीसगढ़िया खान-पान अपनी सादगी और बेहतरीन स्वाद के लिए पूरी दुनिया में पहचान बना रहा है। यहां की मिट्टी की सौंधी महक यहां के व्यंजनों में भी रची-बसी है। अगर आप भी खाने-पीने के शौकीन हैं, तो छत्तीसगढ़ का 'जायका' आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाएगा।
पेश है छत्तीसगढ़ के उन चुनिंदा शाकाहारी व्यंजनों पर आधारित एक विशेष रिपोर्ट, जो स्वाद और सेहत का बेजोड़ संगम हैं...

पके हुए चावल और चावल के आटे के मेल से तैयार 'फरा' को भाप (Steam) में पकाया जाता है। जब इसे तिल और मिर्च के तड़के के साथ हरी चटनी के साथ परोसा जाता है, तो इसका स्वाद किसी भी विदेशी डिश को मात दे सकता है।

चावल के आटे के घोल से बना यह पतला पैनकेक छत्तीसगढ़ के हर घर की पहली पसंद है। टमाटर और धनिया की चटनी के साथ इसका कॉम्बिनेशन नाश्ते को यादगार बना देता है।

बरा: उड़द दाल से बना यह वड़ा शादियों और त्यौहारों की जान है।

मुठिया: चावल के आटे को मसालों के साथ गूंथकर भाप में पकाया जाता है और फिर राई-करी पत्ते के साथ फ्राई किया जाता है।

बाफौरी: चना दाल और सब्जियों के मिश्रण को भाप में पकाकर बनाया जाता है, जो डाइट पर रहने वालों के लिए बेहतरीन विकल्प है।

आमट: इसे बस्तर का 'सांभर' कह सकते हैं। बैंबू शूट्स (बांस के कोपल) के साथ बनने वाली यह मिक्स्ड वेजिटेबल डिश एक अनोखा 'अर्दी' स्वाद देती है।

दही की कढ़ी में जब उड़द दाल की बड़ी को सीधे डालकर पकाया जाता है, तो उसे 'डुबकी कढ़ी' कहते हैं। यह डिश चावल के साथ स्वर्ग जैसा अनुभव कराती है।
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चावल के आटे की इस मोटी रोटी को पलाश या केले के पत्तों के बीच रखकर कोयले की आंच पर सेंका जाता है। पत्तों की खुशबू इस रोटी को दुनिया की सबसे स्वादिष्ट रोटियों की फेहरिस्त में खड़ा करती है।

छत्तीसगढ़ के त्यौहारों (विशेषकर पोला और तीजा) में बेसन की कुरकुरी 'ठेठरी' और गेहूं-गुड़ से बनी मीठी 'खुरमी' का जोड़ हर किसी का दिल जीत लेता है।
छत्तीसगढ़ी खाना इस बात का प्रमाण है कि स्वाद पाने के लिए भारी मसालों की जरूरत नहीं होती। यहाँ की कुकिंग तकनीक (भाप में पकाना और कोयले पर सेंकना) इसे न केवल स्वादिष्ट बल्कि अत्यधिक पौष्टिक भी बनाती है।