सावधान! रात के अंधेरे में मोबाइल चलाना छीन सकता है आपकी आंखों की रोशनी, जानें 'ग्लूकोमा' का डिजिटल कनेक्शन
Eye Health: क्या आप भी रात को सोने से पहले कमरे की लाइट बंद कर घंटों मोबाइल स्क्रॉल करते हैं? अगर हाँ, तो यह आदत आपकी आंखों के लिए 'साइलेंट किलर' साबि ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 09 Jan 2026 09:10:01 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Jan 2026 09:10:01 PM (IST)
मोबाइल चलाना छीन सकता है आपकी आंखों की रोशनी। (Picture Credit- AI Generated)HighLights
- आंखों की रोशनी का 'साइलेंट थेफ्ट'
- फोन की स्क्रीन और बढ़ता प्रेशर
- डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके
लाइफस्टाइल डेस्क। क्या आप भी रात को सोने से पहले कमरे की लाइट बंद कर घंटों मोबाइल स्क्रॉल करते हैं? अगर हां, तो यह आदत आपकी आंखों के लिए 'साइलेंट किलर' साबित हो सकती है। चिकित्सा जगत में ग्लूकोमा (Glaucoma) को 'दृष्टि का खामोश चोर' कहा जाता है, क्योंकि यह बिना किसी दर्द या आहट के आपकी आंखों की रोशनी चुरा लेता है।
जनवरी को ग्लूकोमा अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हमारी आधुनिक जीवनशैली और मोबाइल का अत्यधिक उपयोग इस गंभीर बीमारी के खतरे को बढ़ा रहा है।
क्यों खतरनाक है अंधेरे में मोबाइल का इस्तेमाल?
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (वैशाली) में ऑप्थेल्मोलॉजी डायरेक्टर डॉ. रिंकी आनंद गुप्ता के अनुसार, ग्लूकोमा का सीधा संबंध आंखों के अंदर बढ़ने वाले दबाव (Intraocular Pressure) से है। जब यह दबाव बढ़ता है, तो आंखों की मुख्य नस (Optic Nerve) क्षतिग्रस्त होने लगती है।
मोबाइल और ग्लूकोमा के बीच के जोखिम को इन तीन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- आंखों पर अतिरिक्त तनाव: अंधेरे कमरे में मोबाइल की तेज रोशनी आंखों की पुतलियों पर दबाव डालती है, जिससे ऑप्टिक नर्व पर बुरा असर पड़ता है।
- ब्लू लाइट और नींद का चक्र: मोबाइल से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारी नींद के हार्मोन 'मेलाटोनिन' को प्रभावित करती है। नींद पूरी न होने से आंखों का प्रेशर बढ़ जाता है, जो ग्लूकोमा के मरीजों के लिए घातक है।
- पलकें न झपकाना: स्क्रीन पर फोकस करते समय हम सामान्य से कम बार पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखें ड्राई हो जाती हैं और तनाव बढ़ता है।
किन्हें है सबसे ज्यादा खतरा?
डॉक्टरों के मुताबिक, यदि आप नीचे दी गई श्रेणियों में आते हैं, तो आपको दोगुना सतर्क रहने की जरूरत है:
- जिनकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है।
- जिनके परिवार में पहले किसी को ग्लूकोमा रहा हो।
- डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर के मरीज।
- लंबे समय तक चश्मे का भारी नंबर इस्तेमाल करने वाले लोग।
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बचाव के लिए अपनाएं ये 3 'गोल्डन रूल्स'
ग्लूकोमा से होने वाला नुकसान स्थाई होता है, यानी एक बार रोशनी चली गई तो उसे वापस नहीं लाया जा सकता। इसलिए बचाव ही एकमात्र रास्ता है:
- डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप को पूरी तरह बंद कर दें।
- नाइट मोड का उपयोग: अगर मजबूरी में फोन चलाना पड़े, तो ब्राइटनेस न्यूनतम रखें और 'वार्म लाइट' या 'ब्लू लाइट फिल्टर' ऑन रखें।
- नियमित जांच: 40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार आंखों के दबाव (IOP) की जांच जरूर करवाएं।
याद रखें: सिरदर्द या धुंधली दृष्टि को केवल थकान न समझें, यह आपकी आंखों की सुरक्षा के लिए एक चेतावनी हो सकती है।