
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। दिल्ली में पुलिस ने दो दिन पहले ट्रेन से अवैध रूप से लाया गया केमीकल युक्त चायनीज लहसून भारी मात्रा में जब्त किया है। इस पर भारत सरकार ने 2014 से बैन लगा रखा है। ऐसे में जब दिल्ली में यह चायनीज लहसुन पहुंच सकता है तो ग्वालियर में आपके रसाेई घर तक भी पहुंच सकता है।
शहर की लक्ष्मीगंज सब्जी मंडी और स्थानीय खुदरा बाजारों में भी सस्ता होने के कारण इस हानिकारक चाइनीज लहसुन के पहुंचने की संभावना अधिक है। आपकी रसोई तक यह इसलिए पहुंच सकता है क्योंकि सामान्यत: देखने में यह देसी लहसुन की तरह ही होता है लेकिन यह सस्ता होता है।
चूंकि लहसुन खरीदते समय केवल लोग इसके आकार, रंग व कली को देखते हैं, साथ ही लोगों को पता नहीं होता कि चायनीज लहसुन भी बाजार में आ सकता है। ऐसे में यह रसोई तक पहुंच सकता है।
चाइनीज लहसुन मुख्य रूप से चीन में उगाया जाता है, जिसे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रतिकूल प्रभावों के कारण भारत में बैन किया गया था। लंबे समुद्री सफर के दौरान सड़ने और फंगल इन्फेक्शन से बचाने के लिए इस पर मिथाइल ब्रोमाइड जैसे बेहद जहरीले केमिकल्स का लेप लगाया जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे रसायनों का लगातार सेवन नर्वस सिस्टम को डैमेज कर सकता है, हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है और कैंसर का खतरा बढ़ाता है। लहसुन को चमकदार और एकदम दूधिया सफेद दिखाने के लिए इसे क्लोरीन या क्लोराइड के घोल में डुबोया जाता है, जो शरीर में धीमे जहर का काम करता है।
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केंद्र सरकार द्वारा साल 2014 से पूरी तरह प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद बाजार में प्रतिबंधित चाइनीज लहसुन की तस्करी और अवैध बिक्री थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में ट्रेनों और अवैध ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के जरिए बिहार-नेपाल सीमा से होते हुए देश के प्रमुख शहरों सहित मध्य प्रदेश की मंडियों में इसकी खेप पहुंचाए जाने का खुलासा हुआ है।
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अवैध कारोबारी कम लागत और ज्यादा मुनाफे के चक्कर में नेपाल और पूर्वोत्तर राज्यों के गैर-कानूनी रास्तों से इसे देश में लाते हैं। साथ ही इसे देसी लहसुन से सस्ता बेचा जाता है। इसलिए सब्जी खरीदते समय केवल आकार और चमक न देखें, बल्कि देसी लहसुन ही खरीदें।