
अखिल शर्मा, रायपुर। कम उम्र में हार्ट अटैक के पीछे हमेशा पहले से मौजूद मधुमेह या उच्च रक्तचाप ही जिम्मेदार हो, ऐसा जरूरी नहीं है। रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में हुए एक अध्ययन में 40 वर्ष या उससे कम उम्र के 65.28 प्रतिशत मरीजों में कोई अन्य सह-रोग नहीं मिला। इसके बावजूद इन मरीजों को एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (एसीएस) की स्थिति में अस्पताल पहुंचना पड़ा। अध्ययन में युवाओं में शराब, सिगरेट, गुटखा सेवन और मोटापा जैसे जोखिम अधिक पाए गए।
पं. जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय और बीआर आंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन और कार्डियोलाजी विभाग ने मार्च 2024 से फरवरी 2025 के बीच 288 एसीएस मरीजों पर अध्ययन किया। इनमें 40 वर्ष या उससे कम उम्र के 144 और 40 वर्ष से अधिक उम्र के 144 मरीज शामिल थे।

अध्ययन में दोनों आयु वर्ग के मरीजों के लक्षण, जोखिम कारक और एंजियोग्राफी के परिणामों की तुलना की गई। युवा मरीजों में नशे से जुड़े जोखिम ज्यादा अध्ययन में 40 वर्ष या उससे कम उम्र के 19.44 प्रतिशत मरीज मोटापे से ग्रस्त मिले।
40 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों में यह आंकड़ा 6.25 प्रतिशत था। युवाओं में शराब सेवन 45.14 प्रतिशत, सिगरेट सेवन 22.91 प्रतिशत और गुटखा सेवन 16.67 प्रतिशत पाया गया।
अधिक उम्र के मरीजों में यह क्रमश: 29.87, 8.33 और 5.56 प्रतिशत रहा। 40 से अधिक वर्ग के लोगों में पुरानी बीमारियों का बोझ इसके उलट अधिक उम्र के मरीजों में पुरानी बीमारियों का बोझ ज्यादा मिला।
इनमें 52.78 प्रतिशत को उच्च रक्तचाप और 38.20 प्रतिशत को टाइप-2 मधुमेह था। युवा मरीजों में उच्च रक्तचाप 24.31 और मधुमेह 18.06 प्रतिशत रहा।
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हार्ट अटैक के लक्षणों में सीने में दर्द सबसे प्रमुख रहा। 40 वर्ष या उससे कम उम्र के 75 प्रतिशत रोगियों में सीने में दर्द की शिकायत थी। अधिक उम्र के रोगियों में भी यह आंकड़ा 75.69 प्रतिशत रहा। सीने में भारीपन, सांस फूलना और सीने में जलन भी रोगियों में देखी गई।
एंजियोग्राफी में युवा रोगियों ने 40.96 प्रतिशत को सिंगल वेसल डिजीज मिली। यानी हृदय की एक प्रमुख रक्तवाहिका में बीमारी पाई गई। ट्रिपल वेसल डिजीज युवा में 13.89 प्रतिशत रही। अधिक उम्र के रोगियों में सिंगल वेसल डिजीज 34.73 और ट्रिप्लेट वेसल डिजीज 25 प्रतिशत रही।
40 वर्ष या उससे कम उम्र के 19.44 प्रतिशत रोगी मोटापे से ग्रस्त मिले। यह आंकड़ा 6.25 प्रतिशत था। युवाओं में शराब सेवन 45.14 प्रतिशत, सिगरेट सेवन 22.91 प्रतिशत और गुटखा सेवन 16.67 प्रतिशत पाया गया। अधिक उम्र के रोगियों में यह क्रमशः 29.87, 8.33 और 5.56 प्रतिशत रहा।
इसके उलट अधिक उम्र के रोगियों में पुरानी बीमारियों का बोझ ज्यादा मिला। इनमें 52.78 प्रतिशत को उच्च रक्तचाप और 38.20 प्रतिशत को टाइप 2 मधुमेह था। युवा रोगियों में उच्च रक्तचाप 24.31 और मधुमेह 18.06 प्रतिशत रहा। यानी युवाओं में हार्ट अटैक के साथ पारंपरिक बीमारियों की तुलना में जीवनशैली से जुड़े जोखिम अधिक नजर आए।
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यानी युवाओं में हार्ट अटैक के साथ पारंपरिक बीमारियों की तुलना में जीवनशैली से जुड़े जोखिम अधिक नजर आए। 75 प्रतिशत युवाओं में सीने में दर्द हार्ट अटैक के लक्षणों में सीने में दर्द सबसे प्रमुख रहा। 40 वर्ष या उससे कम उम्र के 75 प्रतिशत मरीजों में सीने में दर्द की शिकायत थी।
अधिक उम्र के मरीजों में भी यह आंकड़ा 75.69 प्रतिशत रहा। सीने में भारीपन, सांस फूलना और सीने में जलन भी मरीजों में देखी गई। एंजियोग्राफी में युवा मरीजों में 40.98 प्रतिशत को सिंगल वेसल डिजीज मिली।
यानी हृदय की एक प्रमुख रक्तवाहिका में बीमारी पाई गई। ट्रिपल वेसल डिजीज युवा मरीजों में 13.89 प्रतिशत रही। अधिक उम्र के मरीजों में सिंगल वेसल डिजीज 34.73 और ट्रिपल वेसल डिजीज 25 प्रतिशत रही।
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अध्ययन में प्री-कोविड 2018-19 और 2024-25 के आंकड़ों की तुलना में युवा एसीएस मरीजों के जोखिम कारकों में भी बदलाव सामने आया। टाइप-2 मधुमेह 10.34 से बढ़कर 45.13 प्रतिशत और शराब सेवन 26.44 से बढ़कर 50.77 प्रतिशत हुआ। तंबाकू सेवन 16.09 से बढ़कर 29.74 प्रतिशत दर्ज किया गया। धूम्रपान में हालांकि बहुत कम बदलाव मिला और यह 27.59 से बढ़कर 28.21 प्रतिशत रहा।

युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के पीछे बदलती जीवनशैली प्रमुख कारण है। लंबे समय तक बैठे रहना, व्यायाम की कमी, मोटापा, धूम्रपान, गुटखा और शराब का सेवन हृदय की धमनियों पर असर डाल सकता है। कोरोना के बाद शारीरिक गतिविधि कम होने और खानपान में बदलाव से मोटापा, मधुमेह और अन्य मेटाबोलिक जोखिम भी बढ़े हैं। इससे कम उम्र में हृदय रोग का खतरा बढ़ रहा है। बचाव के लिए रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम, संतुलित भोजन, तनाव पर नियंत्रण और नशे से पूरी तरह दूरी जरूरी है। परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो तो नियमित जांच करानी चाहिए।
स्मिथ श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, कार्डिलाजी विभाग, आंबेडकर अस्पताल