
लाइफस्टाइल डेस्क: अमेरिका में इन दिनों एक ऐसे संक्रमण का तेज़ी से प्रसार हो रहा है जिसे आमतौर पर “विंटर वॉमिटिंग डिज़ीज” (Winter Vomiting Disease) कहा जाता है। इस बीमारी के पीछे असली कारण है नोरोवायरस (NoroVirus), जो अत्यधिक संक्रामक माना जाता है और गैस्ट्रोएंटेराइटिस यानी पेट व आंतों से जुड़े गंभीर लक्षण पैदा करता है। यह वायरस विशेष रूप से बुजुर्गों, छोटे बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए बड़ा खतरा साबित हो रहा है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानें।

नोरोवायरस एक संक्रमणकारी वायरस है जो उल्टी, दस्त और पेट में सूजन जैसे लक्षण उत्पन्न करता है। यह संक्रमित व्यक्ति की उल्टी या मल के संपर्क में आने से तेजी से फैल जाता है। इसकी खास बात यह है कि संक्रमण से ठीक होने के बाद भी मरीज लगभग दो हफ्तों तक दूसरों को संक्रमित कर सकता है, जिससे इसका नियंत्रण चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
यह वायरस अचानक असर दिखाता है और कुछ ही घंटों में बीमारी के लक्षण उभरने लगते हैं। मुख्य लक्षण हैं-
कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में ये लक्षण 1–3 दिनों तक बने रह सकते हैं।
अमेरिका में तेजी से बढ़ रहे मामले
हाल के आंकड़े अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा रहे हैं। CDC (Centers for Disease Control and Prevention) के मुताबिक-
स्टैनफोर्ड डेटा में बढ़ती गंभीरता
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के WastewaterSCAN प्रोग्राम ने भी चिंताजनक रुझान दिखाया है। अक्टूबर से अब तक अमेरिका के अपशिष्ट जल में नोरोवायरस के स्तर में 69% वृद्धि दर्ज की गई है। लुइज़ियाना, मिशिगन और इंडियाना जैसे राज्यों में संक्रमण का स्तर विशेष रूप से अधिक पाया गया। प्रोग्राम मैनेजर अमांडा बिडवेल के अनुसार, “हम फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर नोरोवायरस की उच्च श्रेणी का अनुभव कर रहे हैं।” हालांकि पिछले साल की तुलना में यह थोड़ा कम है, फिर भी सर्दियों में इसका फैलाव हर साल एक स्पष्ट पैटर्न के रूप में सामने आ रहा है।
नोरोवायरस से बचाव कैसे करें?
हाथों की नियमित सफाई
पर्याप्त तरल पदार्थ लें
सतहों की साफ-सफाई
हाई-टच सतहों को ब्लीच-आधारित क्लीनर से साफ रखें।
खाने-पीने की सुरक्षा
हर साल सर्दियों में नोरोवायरस तेजी से फैलता है, लेकिन इस वर्ष इसके मामलों में असामान्य वृद्धि स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गई है। साफ-सफाई, भोजन की सुरक्षा और सतर्कता अपनाकर ही इस तेजी से फैलने वाले वायरस से खुद को और दूसरों को बचाया जा सकता है।
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