आंखों में आंखें डालकर बात करने से डरते हैं? अपनाएं ये आसान ट्रिक्स
सोचिए आप किसी अहम मीटिंग में बैठे हैं या किसी खास इंसान से बातचीत कर रहे हैं। कहने को आपके पास ढेर सारी बातें हैं, लेकिन जैसे ही सामने वाले की नजर आपक ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 11 Jan 2026 10:28:03 AM (IST)Updated Date: Sun, 11 Jan 2026 10:28:03 AM (IST)
आंखे मिलाकर कैसे बात करें लाइफस्टाइल डेस्क। सोचिए आप किसी अहम मीटिंग में बैठे हैं या किसी खास इंसान से बातचीत कर रहे हैं। कहने को आपके पास ढेर सारी बातें हैं, लेकिन जैसे ही सामने वाले की नजर आपकी आंखों से टकराती है, आत्मविश्वास अचानक कमजोर पड़ने लगता है। नजरें भटकने लगती हैं और सामने बैठे व्यक्ति से ज्यादा दिलचस्प आपको आसपास की चीजें लगने लगती हैं।
अगर आपने भी ऐसा महसूस किया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आंखों में आंखें डालकर बात करना सिर्फ बॉडी लैंग्वेज का हिस्सा नहीं, बल्कि बिना शब्दों के अपनी बात रखने और सामने वाले पर अच्छा प्रभाव डालने का तरीका है। अच्छी बात यह है कि इस स्किल को थोड़ी-सी प्रैक्टिस से बेहतर बनाया जा सकता है।
‘ट्रायंगल’ ट्रिक अपनाएं
अगर सीधे आंखों में देखना आपको असहज करता है, तो सामने वाले के चेहरे पर एक काल्पनिक त्रिकोण बनाएं। कभी एक आंख, कभी दूसरी आंख और फिर नाक या होंठों के पास नजर ले जाएं। इससे सामने वाले को लगेगा कि आप ध्यान से सुन रहे हैं और आपको भी दबाव महसूस नहीं होगा।
50/70 का आसान फॉर्मूला
बातचीत के दौरान हर वक्त आंखों में देखते रहना जरूरी नहीं है। बोलते समय लगभग आधा समय और सुनते समय करीब 70 प्रतिशत आई कॉन्टैक्ट बनाए रखें। यह संतुलन बातचीत को सहज बनाता है और आपका आत्मविश्वास भी झलकता है।
आंखों के रंग पर ध्यान दें
पहली मुलाकात में सामने वाले की आंखों का रंग पहचानने की कोशिश करें। ऐसा करने के लिए आपको कुछ सेकंड तक नजर मिलानी पड़ेगी, जिससे धीरे-धीरे आई कॉन्टैक्ट बनाने की आदत बन जाती है।
अपनों के साथ अभ्यास करें
सीधे अजनबियों या इंटरव्यू में खुद को परखने से पहले दोस्तों, परिवार या करीबी लोगों के साथ प्रैक्टिस करें। जब आप परिचित लोगों के सामने सहज हो जाएंगे, तो बाहर की दुनिया में भी कॉन्फिडेंस अपने आप दिखने लगेगा।
नजरें हटाना भी है जरूरी
आई कॉन्टैक्ट का मतलब घूरना नहीं होता। अगर असहज लगने लगे तो कुछ सेकंड बाद नजरें हल्के से हटा लें और फिर दोबारा सामने देखें। यह छोटा सा ब्रेक आपको रिलैक्स रखेगा और बातचीत को स्वाभाविक बनाएगा। याद रखें, आत्मविश्वास धीरे-धीरे बनता है। रोजमर्रा की बातचीत में इन छोटी आदतों को शामिल करें, क्योंकि कई बार आपकी आंखें आपकी बातों से ज्यादा असरदार साबित होती हैं।
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