
लाइफस्टाइल डेस्क। अक्सर रिश्तों की शुरुआत दोस्ती से होती है, जो समय के साथ प्यार में बदल जाती है। लेकिन हर रिश्ता मंजिल तक नहीं पहुंच पाता और कई बार बात ब्रेकअप तक आ जाती है। ब्रेकअप भी अलग-अलग तरह के होते हैं। कुछ लोग एक-दूसरे से पूरी तरह दूरी बना लेते हैं, जबकि कुछ प्रेमी आपसी सहमति से अलग होने के बाद दोस्त बने रहने का फैसला करते हैं। हालांकि, यह फैसला हर बार सफल हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
अगर आप भी ब्रेकअप के बाद अपने एक्स पार्टनर के साथ दोस्ती बनाए रखने की सोच रहे हैं, तो इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बिना सीमाएं तय किए दोस्ती की कोशिश आगे चलकर मानसिक उलझन और भावनात्मक परेशानी बढ़ा सकती है।
खुद को वक्त देना जरूरी
ब्रेकअप के तुरंत बाद दोस्ती में बदल जाना आसान नहीं होता। किसी भी रिश्ते से बाहर निकलने के लिए समय चाहिए। यह समय आपको अपने जज्बातों को समझने और खुद को भावनात्मक रूप से मजबूत करने में मदद करता है। जल्दबाजी में दोस्ती शुरू करने से पुरानी भावनाएं दोबारा हावी हो सकती हैं।
बातचीत की सीमा तय करें
एक्स के साथ दोस्ती करने से पहले साफ नियम बनाना जरूरी है। तय करें कि बातचीत कितनी और किस तरह की होगी। किन विषयों पर बात करनी है और किन पर नहीं। अगर आप या आपका एक्स किसी नए रिश्ते में हैं, तो सीमाएं और भी जरूरी हो जाती हैं। इससे गलतफहमियों से बचा जा सकता है।
अपने जज्बातों को पहचानें
दोस्ती तभी टिक पाएगी जब दोनों लोग अपने इमोशन्स को लेकर साफ हों। अगर किसी एक के मन में अब भी प्यार है, तो दोस्ती दर्द और कन्फ्यूजन बढ़ा सकती है। इसलिए खुद से ईमानदारी से सवाल करें कि क्या आप सच में आगे बढ़ चुके हैं।
दिखावे की दोस्ती से बचें
दोस्ती तभी मजबूत होती है जब उसमें सच्चाई हो। सिर्फ हालात या डर की वजह से दोस्त बने रहना आगे चलकर तकलीफ दे सकता है। खुलकर बात करें और साफ रखें कि दोस्ती का मतलब सिर्फ सपोर्ट और सम्मान है, न कि कोई रोमांटिक रिश्ता।
गलत उम्मीदें न पालें
ब्रेकअप के बाद दोस्ती का यह मतलब नहीं कि रिश्ता दोबारा शुरू हो जाएगा। दोस्ती को नए रिश्ते की उम्मीद से जोड़ना इसे भी खराब कर सकता है। दोस्ती को उसकी सही जगह पर रखें।
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