
लाइफस्टाइल डेस्क। लिवर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। खान-पान और दिनचर्या में गड़बड़ी का असर लिवर की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए सुपाच्य और सीमित मात्रा में भोजन करना चाहिए। एक बार में बहुत अधिक भोजन करने के बजाय कम मात्रा में और जरूरत के अनुसार भोजन लेना बेहतर है, ताकि पाचन तंत्र पर अतिरिक्त भार न पड़े।
अग्निमंद यानी पाचन क्षमता कमजोर होने पर भोजन का पाचन ठीक से नहीं हो पाता। लंबे समय तक खान-पान की गड़बड़ी और शारीरिक निष्क्रियता का असर लिवर के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
लिवर शरीर में वसा और कोलेस्ट्रोल के चयापचय से जुड़ा होता है, इसलिए लिवर की कुछ स्थितियों में कोलेस्ट्रोल के स्तर में बदलाव भी देखा जा सकता है।

हालांकि, बढ़े हुए कोलेस्ट्रोल के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। आयुर्वेद वैद्य सौरभ मेहता के अनुसार संतुलित और सीमित आहार के साथ नियमित व्यायाम लिवर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।
रोज पैदल चलना आसान विकल्प है। आहार-विहार और दिनचर्या को व्यवस्थित रखना चाहिए। भोजन का समय भी नियमित रखें और सूर्योदय के बाद उचित अंतराल पर ही भोजन करें।
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हेल्दी लिवर आपके शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। लेकिन आप अपने लिवर को बेहतर तरीके से कैसे सपोर्ट कर सकते हैं? लिवर की हेल्थ और बेहतर डिटॉक्स के लिए सप्लीमेंट्स में मिल्क थिसल, हल्दी, आर्टिचोक लीफ और डैंडेलियन रूट शामिल हो सकते हैं। लिवर की हेल्थ के लिए हेल्दी डाइट लेना भी ज़रूरी है।
19वीं सदी में पहली बार पहचानी गई फैटी लिवर डिज़ीज़ को शुरू में ज़्यादा शराब पीने का नतीजा माना जाता था। 1980 के दशक में, डॉक्टरों ने शराब न पीने वाले लोगों में भी इसी तरह के लिवर डैमेज को देखने के बाद “नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिज़ीज़” शब्द बनाया।
2023 में, फैटी लिवर डिज़ीज़ का नाम बदलकर स्टीटोटिक लिवर डिज़ीज़ कर दिया गया, यह एक अम्ब्रेला टर्म है जिसका मतलब लिवर में फैट जमा होना है। अब इसे तीन मुख्य टाइप में बांटा गया है।