
लाइफस्टाइल डेस्क। भारत का दिल कहे जाने वाले 'मध्य प्रदेश' की खूबसूरती सिर्फ खजुराहो के मंदिरों, पचमढ़ी की पहाड़ियों या कान्हा के जंगलों तक सीमित नहीं है। यहाँ की असली आत्मा बसती है यहाँ की तंग गलियों से उठने वाली उस खुशबू में, जो कढ़ाई में छनती जलेबियों और उबलते हुए पोहे से आती है।
अगर आप एक फूडी (Foodie) हैं और मध्य प्रदेश की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो तैयार हो जाइए एक ऐसी 'फूड ट्रिप' के लिए जहां हर निवाला एक नई कहानी सुनाता है। यहाँ के 9 ऐसे शाकाहारी व्यंजन हैं, जिनका स्वाद आपकी जुबान पर हमेशा के लिए ठहर जाएगा:

मध्य प्रदेश, खासकर इंदौर की सुबह की शुरुआत 'पोहा' के बिना अधूरी है। यहां का पोहा देश के अन्य हिस्सों से अलग इसलिए है क्योंकि इसे सीधे आंच पर नहीं, बल्कि भाप (Steam) में पकाया जाता है। इसके ऊपर डलने वाला जीरावन मसाला, बारीक कटा प्याज, अनार के दाने और कड़क इंदौरी सेव इसे दुनिया का सबसे बेहतरीन नाश्ता बनाते हैं।

पोहा खाया और साथ में जलेबी नहीं ली? तो आपने एमपी का कल्चर ही नहीं समझा। मालवा क्षेत्र में कुरकुरी, रसभरी केसरिया जलेबियों को जब ठंडी, मलाईदार रबड़ी के साथ परोसा जाता है, तो यह मीठे और कुरकुरेपन का एक ऐसा तालमेल बनाता है कि आप उंगलियां चाटते रह जाएंगे।

यह व्यंजन आपको और कहीं नहीं मिलेगा। ताजे भुट्टे (कॉर्न) को कद्दूकस करके, दूध और मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है। अंत में नारियल और हरा धनिया इसकी खूबसूरती और स्वाद दोनों बढ़ा देते हैं। मानसून के मौसम में इंदौर के सराफा बाजार में इसका स्वाद लेना एक अलग ही अनुभव है।

राजस्थान की दाल-बाटी से प्रभावित होने के बावजूद, 'दाल बाफला' का अपना स्वैग है। बाफले के आटे की लोई को पहले पानी में उबाला जाता है और फिर घी में डुबोकर सेंका जाता है। इसे तीखी अरहर दाल, ढेर सारा देसी घी और तीखी लहसुन की चटनी के साथ खाना किसी उत्सव से कम नहीं है।

इंदौर के सराफा बाजार का 'जोशी जी का दही बड़ा' न केवल अपने स्वाद बल्कि परोसने के अंदाज के लिए भी मशहूर है। बेहद मुलायम बड़े को गाढ़े दही में भिगोया जाता है और ऊपर से खास मसालों की चुटकी इस तरह छिड़की जाती है कि वह एक कलाकृति लगने लगती है।

यह देखने में भले ही गुलाब जामुन जैसा लगे, लेकिन मावा बाटी उससे कहीं ज्यादा समृद्ध है। इसके अंदर सूखे मेवों (ड्राई फ्रूट्स) और मावा की फिलिंग होती है। इलायची की खुशबू वाली चाशनी में डूबी यह मिठाई किसी भी शाही भोजन का सबसे सुखद अंत है।

अरबी के पत्तों पर बेसन का चटपटा पेस्ट लगाकर उन्हें रोल किया जाता है और फिर भाप में पकाया जाता है। इसके बाद राई और तिल का तड़का इसे एक सौंधी खुशबू और लाजवाब टेक्सचर देता है। यह खट्टा-मीठा स्वाद सेहत के लिए भी बेहतरीन है।

जबलपुर और भोपाल जैसे शहरों में मिलने वाली कचौड़ियां अपने तीखेपन के लिए प्रसिद्ध हैं। चाहे वह मूंग की दाल की हो या मटर की, इन्हें सोंठ और पुदीने की चटनी के साथ गरमा-गरम खाना हर यात्री की पहली पसंद होती है।
यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ का जायका: 'देसी मोमोज' से लेकर 'बाफौरी' तक, ये डिशेज चख लिए तो भूल जाएंगे पंजाबी खाना!

यहां के छोले मसालों में काफी गहराई होती है और भटूरे बेहद फूले हुए व नरम होते हैं। मध्य प्रदेश के स्थानीय बाजारों में मिलने वाले चना-भटूरे का अपना ही देसी स्वाद है, जो आपको दिल्ली के छोले-भटूरों की याद तो दिलाएगा पर एक अलग 'मध्य प्रदेशी' टच के साथ।