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विश्व आर्थराइटिस दिवस: जोड़ों में दर्द को थकान समझ रहे युवा, भीतर ही भीतर बढ़ रही गठिया की बीमारी

World Arthritis Day: गठिया रोग मूलत: प्यूरिन नामक प्रोटीन के मेटाबोलिज्म की वजह से होती है। खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। व्यक्ति कुछ देर ...और पढ़ें

By Anoop BhargavEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 12:41:45 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 12:51:33 PM (IST)
विश्व आर्थराइटिस दिवस: जोड़ों में दर्द को थकान समझ रहे युवा, भीतर ही भीतर बढ़ रही गठिया की बीमारी
विश्व आर्थराइटिस दिवस 2026

HighLights

  1. आर्थराइटिस को लेकर बढ़ी चिंता, 35 से 45 की उम्र में भी दिख रहा असर।
  2. महिलाओं में मामले, बदलती जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों पर सवाल।
  3. गठिया के कुछ प्रकार महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक पाए जाते हैं।

लाइफस्‍टाइल डेस्‍क। घुटनों में दर्द, उंगलियों के जोड़ों में सूजन और सुबह उठते ही हाथ-पैरों में अकड़न… अगर ये लक्षण बुजुर्गों में दिखाई दें तो लोग उम्र का असर मान लेते हैं, लेकिन यही परेशानी अब युवाओं को भी सताने लगी है।

अब 35 से 45 साल की उम्र के लोग भी जोड़ों की तकलीफों से जूझ रहे हैं। महिलाओं में इसकी समस्या अधिक देखी जा रही है। 25 से 35 साल की दस में पांच महिलाएं इससे पीड़ित हैं। जबकि पुरुषों पीड़ित पुरुषों की संख्या दो है। बदलती जीवनशैली के बीच जोड़ों का दर्द अब केवल बढ़ती उम्र की परेशानी नहीं रह गया है।


पारंपरिक रूप से गठिया को बुजुर्गों से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन बीमारी के अलग-अलग प्रकार कम उम्र में भी सामने आ सकते हैं। गठिया के कुछ प्रकार महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक पाए जाते हैं। हार्मोनल बदलाव, आनुवंशिक प्रवृत्ति और प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़े कारक इसमें भूमिका निभा सकते हैं।

25 से 35 वर्ष की उम्र में जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या अकड़न होने पर इसे सामान्य कमजोरी समझकर टालना ठीक नहीं है। समय पर चिकित्सकीय जांच से बीमारी की पहचान और उपचार में मदद मिल सकती है। पैक्ड फूड, स्मोकिंग के साथ वाहन प्रदूषण इसकी सबसे बड़ी वजह हैं। गठिया होने के बाद भी उसको बेअसर किया जा सकता है।

क्‍या है गठिया रोग

गठिया रोग मूलत: प्यूरिन नामक प्रोटीन के मेटाबोलिज्म की वजह से होती है। खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। व्यक्ति कुछ देर के लिए बैठता या फिर सोता है तो यही यूरिक एसिड जोड़ों में इकट्ठा हो जाते हैं, जो अचानक चलने या उठने में तकलीफ देते हैं। ध्यान न देने पर घुटना, कूल्हा आदि इंप्लांट करने की भी नौबत आ जाती है।

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किन बातों का रखना होगा ध्‍यान

डाॅ. रामेश्वर गुप्ता गठिया बाय एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ रहती हैं कि डाइबिटीज के मरीजों की तरह गठिया के मरीज भी सामान्य जिंदगी जी सकते हैं। लेकिन उसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना होगा।

  • जोड़ों में दर्द और शरीर में अकड़न को नजरअंदाज बिलकुल न करें, अगर ऐसा लगातार हो रहा है तो डाक्टर की सलाह लें।
  • अपनी दिनचर्या को नियमित रखना जरूरी है, इसमें गैप खतरनाक हो सकता है। खाने-पीने से लेकर सोने-जगने और एक्सरसाइज समेत सबकुछ नियमित होना चाहिए।
  • एक्सरसाइज गठिया से लड़ने के लिए सबसे जरूरी और असरदार हथियार है। नियमित एक्सरसाइज भी बहुत जरूरी है। लेकिन जो कुछ भी एक्सरसाइज हम कर रहे हैं वह डाॅक्टर की सलाह पर होनी चाहिए।

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फलों और सब्जियों को अच्छे से धोकर ही खाना चाहिए

  • डाॅ. आदित्य कुमार खरे हड्डी एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ सिविल अस्पताल बिरलानगर के मुताबिक, अनुवांशिक कारणों से भी गठिया हो सकती है।
  • यानी आपके पहले की पीढ़ी में अगर किसी को इसके लक्षण रहे हों तो, आगे की पीढ़ी में भी इसके असर दिखने की संभावना रहती है। हालांकि बेहतर खान-पान और अनुशासन ही इसकी काट है।
  • बार-बार वायरल और बैक्टिरियल इंफेक्शन होना भी गठिया की वजह बन सकता है। हमें वायरल और बैक्टिरियल इंफेक्शन से बचना चाहिए।
  • सब्जियों और फलों में इस्तेमाल होने वाले पेस्टीसाइड भी गठिया के रिस्क फैक्टर में से एक हैं। हमें फलों और सब्जियों को अच्छे से धोकर ही खाना चाहिए।

गठिया से बचने यह करें

  • हथेली, उंगलियों, कोहनी, घुटने कूल्हे के जोड़ को चोट लगने से सुरक्षित रखें। गलत तरीके से उठने- बैठने और सोने की आदत न डालें। मोटापे से बचें, कभी-कभी मोटापे से होने वाली बीमारी जैसे डायबिटीज और हाइपरटेंशन भी आर्थराइटिस यानी गठिया की वजह बन सकता है।
  • गठिया से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि स्मोकिंग यानी बीड़ी और सिगरेट से दूर रहें। कैल्शियम और विटामिन डी युक्त डाइट भी गठिया होने से बचा सकती है। एक्सरसाइज सबसे ज्यादा जरूरी है, हफ्ते में पांच दिन 30 मिनट नियमित एक्सरसाइज करनी चाहिए।
  • साफ-सफाई रखकर गठिया से बचा जा सकता है। स्ट्रेस यानी तनाव मुक्त रहने से भी गठिया से बचा जा सकता है, इसलिए ज्यादा न सोचें और खुश रहने का प्रयास करें। योग बहुत जरूरी है। योग के कुछ आसन करके हम अपने आटो इम्यून सिस्टम को अच्छा बनाए रख सकते हैं। पूरी नींद लेना भी जरूरी है।