
नईदुनिया प्रतिनिधि, अनूपपुर। एसईसीएल जमुना-कोतमा क्षेत्र में हेल्थ कैंप आयोजित करने के नाम पर सीएसआर (कारपोरेट सोशल रिस्पान्सिबिलिटी) मद से एनजीओ को किए गए करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला जांच के दायरे में आ गया है।
मामले की पड़ताल के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच की सीआईडी की चार सदस्यीय टीम जमुना-कोतमा पहुंची। टीम ने एसईसीएल के सीएसआर विभाग और अनूपपुर स्वास्थ्य विभाग सहित एनजीओ के कर्मचारियों अधिकारियों से पूछताछ कर दस्तावेजों की जानकारी जुटाई। मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा रही है।
संबंधित विभाग को नोटिस जारी
जांच के दौरान संबंधित विभागों और व्यक्तियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए है। जानकारी के अनुसार, पूरा मामला आरके एचआईवी एड्स् रिसर्च एंड केयर सेंटर नामक एनजीओ के माध्यम से आयोजित स्वास्थ्य शिविरों से जुड़ा है। बताया गया है कि एसईसीएल बिलासपुर जोन की ओर से रायगढ़, अनूपपुर, सूरजपुर और बिलासपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाने के लिए सीएसआर मद से करीब 3.87 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
अब सीआईडी इस बात की जांच कर रही है कि एनजीओ को भुगतान करने से पहले उसकी वास्तविकता, कार्यक्षमता और कर्मचारियों की योग्यता का सत्यापन किया गया था या नहीं। अनूपपुर स्वास्थ्य विभाग के पूर्व सीएमएचओ डॉक्टर एससी राय के अनुसार, फरवरी 2025 में एसईसीएल जमुना-कोतमा क्षेत्र के अधिकारियों ने स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के लिए विभाग से अनुमति मांगी थी। तब इसके लिए अनुमति प्रदान की थी।
सीआईडी की टीम ने बुधवार को शिविरों से संबंधित जानकारी मांगी थी, जिसे उपलब्ध करा दिया गया। सीआईडी ने स्वास्थ्य विभाग को शिविरों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने की प्रक्रिया और आधार के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि स्वास्थ्य विभाग ने एनजीओ और उसके कर्मचारियों की वास्तविकता की जांच करने के बाद अनुमति दी थी या नहीं। जांच में एनजीओ के एक डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों की पहचान को लेकर भी सवाल उठे हैं। बताया गया सीएसआर फंड से ग्रामीण अंचल क्षेत्र में विभिन्न स्वास्थ्य शिविर वर्ष 2022-23 और 24-25 में आयोजित हुए ।
कई गांव में किट्स का वितरण भी हुआ। यह शिविर किसी आदेश के तहत आयोजित हुए अनुमति कैसे दी गई। डाक्टर कितने डिग्री धारी मौजूद रहे। इन सब की जांच पड़ताल हुई या नहीं। भुगतान की प्रक्रिया क्या थी। स्वास्थ्य शिविरों में जिन डॉक्टरों और कर्मचारियों की सेवाएं दर्शाई गईं, उनकी वास्तविकता का पर्याप्त सत्यापन नहीं किया गया।
सीआईडी यह भी जांच कर रही है कि संबंधित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर वास्तव में आयोजित हुए थे या उनके नाम पर कागजों में गतिविधियां दर्शाकर भुगतान प्राप्त किया गया।इस दायरे में जो जो लोग आ रहे हैं, ईडी के साथ अब सीआईडी भी जांच कर रही है जिसके तहत पूरी जांच प्रक्रिया हो रही है।
सीआईडी इंस्पेक्टर सईद ने अनूपपुर में एनजीओ का काम देखने वाले प्रोजेक्ट मैनेजर वैभव जैन से संपर्क कर नोटिस जारी की है।
फिलहाल जांच एजेंसी का पूरा ध्यान 3.87 करोड़ रुपये के भुगतान, एनजीओ की वास्तविक गतिविधियों, स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन, डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की पहचान और स्वास्थ्य विभाग से मिली अनुमति पर है। सीआईडी की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि सीएसआर राशि के भुगतान और उसके उपयोग में कहां तथा किस स्तर पर अनियमितता हुई।