
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट: रविवार को बालाघाट के वारासिवनी में 5.25 करोड़ की लागत से बनने वाले जनपद पंचायत भवन का ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने भूमिपूजन किया, लेकिन कार्यक्रम में मंत्री के सामने अपनी बात रखने पहुंचे आदिवासी समाज के लोग उस वक्त असहज हो गए जब मंत्री ने उन्हें 'हमको समझा रहे हो क्या' कह दिया। इससे जुड़ा 1.13 मिनट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।वीडियो में मंत्री और आदिवासी समाज के बीच कुछ देर की बातचीत है, इसपर लोग अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
दरअसल, आदिवासी समाज के पदाधिकारी भूमिपूजन कार्यक्रम में मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को बड़ा देव पूजा स्थल और भगवान बिरसा मुंडा के प्रतिमा स्थल पर जनपद पंचायत भवन बनाए जाने के विरोध से जुड़ी मांग रख रहे थे।
आदिवासी नेता दिनेश धुर्वे ने बताया कि जिस भूमि पर जनपद पंचायत भवन बनना है, उसके खसरा नंबर 546/3 में से 1.15 एकड़ भूमि में ब्रिटिश काल से गोंड आदिवासी समाज द्वारा बड़ा देव पूजा स्थली है। यहां भगवान बिरसा मुंडा की गोंडी परंपरा अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है। ग्राम पंचायत वारा ने भी उक्त भूमि पर बड़ा देव पूजा स्थल और भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापना की सहमति दी है।
आदिवासी नेता का कहना है कि इस संबंध में हमने जिला कलेक्टर को भी आवदेन दिया था, जिस आधार पर राजस्व निरीक्षक अधिकारी और पटवारी ने पंचनामा बनाकर जांच प्रतिवेदन बनाया है और मामला विचाराधीन है, लेकिन आदिवासी नेता मानसिंह परते को वारासिवनी एसडीएम ने कार्यालय बुलाकर जानकारी दी कि उक्त भूमि पर जनपद पंचायत भवन बनना है, इसलिए बड़ा देव पूजा स्थल और भगवान बिरसा मुंडा प्रतिमा स्थल हटा दिया जाए, जिसका आदिवासी समाज विरोध करता है।
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यही बात जब समाज के नेता और पदाधिकारियों ने मंत्री प्रहलाद पटेल के सामने रखी तो उन्होंने किसी की नहीं सुनी। आदिवासी समाज अब इस मामले में उच्च न्यायालय जाने की तैयारी कर रहा है।
समाज का कहना है कि दशकों से जहां आदिवासी समाज अपने आराध्य बड़ा देव की पूजा कर रहा है, वहां जनपद पंचायत भवन बनाया जा रहा है, जबकि ग्राम पंचायत की इसे लेकर सहमति भी है।