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नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। जिले के बिरसा में खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) रहकर वर्षों तक लोगों का उपचार करने वाले सुनील सिंह की कथित फर्जी पहचान और शैक्षणिक दस्तावेजों का मामला अब भी अनसुलझा है।
बालाघाट पुलिस ने आरोपित सुनील सिंह की पतासाजी के लिए कंट्रोल रूम के माध्यम से रीवा के सभी 26 थानों को सूचना दी है। आरोपित ने अपना मोबाइल बंद रखा है, जिससे पुलिस को उसकी लोकेशन नहीं मिल पा रही है।
मामले में पता चला है कि स्वास्थ्य विभाग के तीन नोटिस के बावजूद वह अपने शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत करने भोपाल नहीं पहुंचा था। पुलिस, दस हजार रुपये के इनामी आरोपित की तलाश कर रही है। विभागीय कार्रवाई और पुलिस की जांच के बीच उसकी पहचान, नाम, पते और डिग्री को लेकर सामने आई गड़बड़ियां मामले को गंभीर बना रही हैं।
अप्रैल 2026 में पुलिस अधीक्षक के पास फर्जी डिग्री की शिकायत पहुंचने के बाद सुनील सिंह मेडिकल अवकाश पर चला गया था। सीएमएचओ डॉक्टर शत्रुघ्न सिंह दाहिया के अनुसार, लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और शिकायत के बाद जून में उसका पद छीन लिया गया।
सितंबर में सीएमएचओ ने उसे तीन बार नोटिस भेजकर शैक्षणिक दस्तावेज भोपाल में पेश करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उसने जवाब नहीं दिया। पुलिस को भी कथित फर्जी नाम और पते के कारण रीवा में गलत ठिकानों तक पहुंचना पड़ा।
आरोपित की तस्वीर दिखाए जाने पर पहचान संबंधी गड़बड़ी सामने आई। पुलिस का कहना है कि उसकी तलाश जारी है और जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद है।
14 वर्षों की नौकरी में 80 लाख वेतन लिया
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आरोपित सुनील सिंह 2009 में संविदा में भर्ती हुआ था। 2012 में नियमित होने के बाद अलग-अलग समय पर पदोन्नत हुआ और प्रथम श्रेणी अधिकारी बना। विभागीय तौर पर मिली जानकारी के अनुसार, आरोपित ने अपने 14 वर्षों के कार्यकाल में लगभग 80 लाख रुपये वेतन प्राप्त किया है।
अधिकारियों का कहना है कि फर्जी तरीके से शासकीय नौकरी प्राप्त करने और लंबे समय तक वेतन प्राप्त करने के बाद ऐसी परिस्थिति में आरोपित से पूरी राशि वसूली जाती है। इसके लिए जमीन कुर्की अथवा अन्य कार्रवाई संभव है।
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दमोह के सरकारी क्वार्टर को सील करने की तैयारी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर दाहिया ने बताया कि राज्य स्तरीय समिति की जांच में आरोपित की एमबीबीएस की डिग्री फर्जी मिली है। इसके अलावा वह लंबे समय से फरार है। इस स्थिति में दमोह स्थित उसके सरकारी आवास को सील करने की कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में पुलिस विभाग को पत्र लिखकर क्वार्टर सील करने कहा जाएगा। बता दें कि कोविड काल में बिरसा क्षेत्र में बड़ी संख्या में कोविड टीकाकरण हुआ था, जो आरोपित और फर्जी डाक्टर सुनील सिंह के मार्गदर्शन में किया गया था। इस कार्यक्रम में आम लोगों के साथ प्रशासनिक और पुलिस विभाग के कई आला अधिकारियों को टीके लगे थे।