
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड। विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे ही प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। मतदाता नेताओं के लुभावनी बातों में न आते हुए सीधे क्षेत्र के विकास की बात कर रहे हैं। लहार और अटेर विधानसभा में प्रचार के दौरान नेताओं को बंदूक, कनेरा योजना के अलावा अटेर-जैतपुर मार्ग पर चंबल पुल और खाद्यान्न जैसी मांगों को लेकर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कई बार तो प्रत्याशी जनता के सवालों का जवाब भी नहीं दे पा रहे हैं।
प्रचार के दौरान मतदाता अपने नेताओं से वोट देने के बदले शस्त्र लाइसेंस बनवाने की मांग कर रहे हैं। कई प्रत्याशी विपक्ष में रहने का बहाना बना रहे हैं और चुनाव जीतने के बाद बंदूक लाइसेंस बनाने का वादा कर रहे हैं। वहीं सत्तापक्ष के प्रत्याशी आचार संहिता हटने के बाद बंदूक के लाइसेंस बनवाने का आश्वासन दे रहे हैं।
क्या है कारण
जिले में वर्ष 2008 से बंदूक के लाइसेंस नहीं बने हैं। जबकि इस क्षेत्र में बंदूक को आन-बान-शान से जोड़कर देखा जाता है और बंदूक नौकरी का साधन भी है।
अटेर क्षेत्र में कनेरा सिंचाई योजना, अटेर पुल निर्माण सहित अटेर को नगर परिषद बनाने प्रमुख मुद्दा है। हालांकि अटेर पुल पर 85 फीसद काम हो गया है।
क्या है कारण - कनेरा प्रोजेक्ट के अधर में रहने से किसान सिंचाई के लिए परेशान हो रहे हैं। जबकि इसके चालू होने ये 15 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। साथ ही अटेर पुल निर्माण का काम अभी धीमी गति से चल रहा है।
भिंड विधानसभा में ऊमरी को नगर परिषद का दर्जा, शहर के आसपास मेडिकल कालेज खोलने और ग्वालियर-इटावा हाइवे को फोर लेन बनाने का मुद्दा अहम है। शहरवासी यह मांग वर्षो से करते आ रहे हैं। प्रचार के दौरान मतदाता प्रत्याशियों से इन कामों को कराने की मांग कर रहे हैं।
क्या है कारण - ऊमरी को तहसील और नगर परिषद बनाने की मांग स्थानीय लोग कई सालों से कर रहे हैं। हालांकि ऊमरी को नगर परिषद बनाने की दस्तावेजी कार्रवाई पूरी हाे गई है। सरकार को गजट नोटिफिकेश में शामिल कर इसकी घोषणा करनी थी।
इस विधानसभा में बंदूक का लाइसेंस, खाद्यान्न वितरण और पेयजल मुहैया कराने की मांग प्रमुख हैं। लोग वोट मांगने जा रहे प्रत्याशियों को प्रचार के दौरान इन मांगों को लेकर घेर लेते हैं।
क्या है कारण - मेहगांव क्षेत्र में कई गांव खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। क्षेत्र में पीडीएस की व्यवस्था भी बेहद खराब है। इसके चलते लोग नाराज हैं।
चुनाव में गोहद सहित ग्रामीण अंचलों में पीने के लिए मीठा पानी, बिजली देने के साथ बेसली डैम से प्रभावित 350 किसानों को मुआवजा देने की मांग चुनावी मुद्दे में शामिल है। ग्रामीण इन मांगों को लेकर नेताओं से बहस करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।
क्या है कारण- जतवार क्षेत्र के 45 गांवों जो साल से खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों को पीने का पानी 2 से 3 किलोमीटर दूर से लाना पड़ रहा है। गोहद नगर में पेयजल समस्या। दो दर्जन गांवों में बिजली की समस्या हैं।