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नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड। ग्वालियर-भिंड-इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन बनाने की प्रक्रिया के बीच अब सड़क के लिए निर्धारित जमीन के सीमांकन का काम शुरू हो गया है। आरओडब्ल्यू के तहत डिमार्केशन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इटावा मार्ग पर डिडी के पास हाईवे के दोनों तरफ 22.5-22.5 फीट की दूरी परसीमेंट की मुड्डियां गाड़कर निर्धारित सीमा को चिह्नित किया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर सीमाओं का सत्यापन करेगी।
भूमि अधिग्रहण से संबंधित होगी कार्रवाई
इसमें यह पता लगाया जाएगा कि फोरलेन निर्माण के लिए निर्धारित क्षेत्र में किस किसान की कितनी जमीन आ रही है और किन लोगों के मकान, दुकान या अन्य प्रतिष्ठान इसकी जद में हैं। सीमांकन और राजस्व सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि अधिग्रहण से संबंधित आगामी कार्रवाई की जाएगी।
इसके तहत नियमानुसार, गजट नोटिफिकेशन प्रकाशित किया जाएगा और संबंधित जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि, जमीन का सीमांकन शुरू होने के बावजूद हाईवे निर्माण के लिए वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने के कारण परियोजना की समयसीमा को लेकर संशय बना हुआ है।
एनएच 719 फोरलेन निर्माण के लिए आरओडब्ल्यू के डिमार्केशन के तहत सड़क की निर्धारित सीमा को जमीन पर भौतिक रूप से चिह्नित किया जाता है। इसके लिए संबंधित स्थानों पर सीमेंट की मुड्डियां लगाई जाती हैं, जिससे सड़क के लिए प्रस्तावित भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
इस प्रक्रिया में हाईवे की अधिकृत चौड़ाई और उसके संरेखण यानी अलाइनमेंट को ध्यान में रखा जाता है। डिमार्केशन पूरा होने के बाद राजस्व विभाग की टीम राजस्व अभिलेखों के आधार पर मौके का सत्यापन करेगी। इसमें संबंधित खसरा, खतौनी, जमाबंदी और भूमि स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा।
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इसके जरिए यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित फोरलेन के लिए निजी और अन्य भूमि का कितना हिस्सा आवश्यक है। साथ ही, यह भी पता चलेगा कि सड़क की सीमा में कितने मकान, दुकान या अन्य निर्माण आ रहे हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सड़क की वास्तविक सीमा स्पष्ट करना, भूमि विवादों की आशंका कम करना और आगे की अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए आवश्यक जानकारी जुटाना है।
पांच बार आगे बढ़ चुकी है बिड जमा करने की तारीख
ग्वालियर-भिंड-इटावा हाईवे को फोरलेन बनाने की परियोजना को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 18 मई 2026 को एडवांस टेंडर जारी किए थे। हालांकि, परियोजना को लेकर केंद्रीय कैबिनेट से वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने के कारण निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाने में बाधाएं आ रही हैं। अब तक बिड सबमिशन की तारीख पांच बार आगे बढ़ाई जा चुकी है।
एनएचएआई के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 31 अक्टूबर 2026 तक ठेका आवंटित किया जाना था। इसके बाद 28 फरवरी 2027 से हाईवे को फोरलेन बनाने का काम शुरू करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन अब टेक्निकल बिड खोलने की तारीख 13 नवंबर निर्धारित की गई है। ऐसे में निविदा प्रक्रिया में हो रही देरी का असर निर्माण कार्य शुरू होने की समय सीमा पर पड़ सकता है।
परियोजना के लिए वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा या नहीं। यदि टेंडर और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में देरी होती है तो फोरलेन निर्माण का काम आगे खिसक सकता है।
फरवरी तक काम शुरू नहीं हुआ तो टोल उखाड़ने की चेतावनी
हाईवे के फोरलेन निर्माण में हो रही देरी को लेकर क्षेत्र में नाराजगी भी बढ़ रही है। चार दिन पहले उमरी स्थित देवगढ़ त्रिमूर्तिधाम परिसर में संत समाज, पूर्व सैनिकों और समाजसेवियों की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में हाईवे के चौड़ीकरण की मांग पर चर्चा करते हुए निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए आगे की रणनीति तय की गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि फरवरी 2027 तक हाईवे को फोरलेन बनाने का काम शुरू नहीं होता है तो इसके बाद बरैठा और बरोही टोल प्लाजा को उखाड़ने का अभियान शुरू किया जाएगा। -ग्वालियर-इटावा हाईवे पर आरओडब्ल्यू के तहत डिमार्केशन की प्रक्रिया शुरू की गई है। जल्द से जल्द इस प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पवन शर्मा, इंजीनिएन, एनएचएआई।
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