
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से मौतों की घटना के बाद से प्रदेशभर में पेयजल और सीवरेज नेटवर्क की जांच की जा रही है। अब तक 5,219 जल रिसाव (लीकेज) चिंह्नित किए गए, इनमें से 4,893 का सुधार करा दिया गया है।
इसे लेकर प्रत्येक मंगलवार को जल सुनवाई भी होती है, जहां अब तक 1,851 शिकायतें मिली हैं, इनमें से 1,732 का निराकरण किया जा चुका है। अधिकांश शिकायतें पानी की गुणवत्ता को लेकर थीं। वहीं 3,298 ओवर हेड टैंकों में से 2,903 ओवर हेड टैंकों की साफ-सफाई कराई गई। इसके साथ ही 7,755 ट्यूबवेलों के जल का परीक्षण कराया गया, इनमें से 58 प्रदूषित (पाल्यूटेड) ट्यूबवेलों को बंद कराया गया है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि प्रदेश के नागरिकों को नगरीय निकायों द्वारा बेहतर, सुरक्षित, निर्बाध जल और सीवर सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निरंतर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश की 413 नगरीय निकायों में पेयजल के 45,749 नमूनों की जांच की गई। 349 प्रदूषित जल परीक्षण मामलों में से 96 पर आवश्यक कार्रवाई की जा चुकी है।
साथ ही उन्होंने बताया कि सीएम हेल्पलाइन (181) पर प्राप्त दूषित पानी की 515 शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है। जल नमूना संग्रहण के लिए प्रदेश में 9,801 अमृत मित्र, 124 केमिस्ट उपलब्ध एवं 845 प्रयोगशालाएं सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। नगरीय निकायों को दिशा-निर्देश जारी आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जल की गुणवत्ता व सीवर व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
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मैदानी अमला निरंतर निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई कर रहा है। नगरीय निकायों को भी शिकायतों के शीघ्र समाधान के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। नागरिकों से भी अपील है कि वे निर्धारित माध्यमों से सूचना दें, ताकि समय पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
नागरिकों द्वारा दिए गए सैम्पल्स की जांच 15 से अधिक मानकों पर की जा रही है। इनमें मुख्य रूप से रंग, स्वाद, गंध और टरबीडिटी, पीएच मान, टीडीएस, क्लोराइड, कुल क्षारीयता, कैल्शियम और मैग्नीशियम कठोरता। रेसिडुअल क्लोरीन के साथ-साथ ई-कोलाई और कोलीफार्म जैसे खतरनाक बैक्टीरिया की उपस्थिति की जांच की जा रही है।