
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी के बड़े तालाब के मुहाने पर बसे खानूगांव को ''नर्क'' बनाने में नगर निगम ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। जिस कुएं से इलाके की एक बड़ी आबादी प्यास बुझाती थी, उसमें पिछले डेढ़ साल से सीवेज (इंसानी मल-मूत्र) का पानी मिलकर ''जहर'' बन चुका था। हैरान करने वाली बात यह है कि निगम के साहबों को इस ''धीमे जहर'' की खबर तब लगी, जब इंदौर में दूषित पानी ने 21 लोगों की बलि ले ली। खानूगांव में नगर निगम की लापरवाही का आलम यह है कि यहां के पानी में ई-कोलाई जैसे जानलेवा बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है।
इस बैक्टीरिया से ही इंदौर में 21 लोगों की मौतें हुईं और कई लोग अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। खानूगांव क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वे गंदे पानी की सप्लाई को लेकर कई महीनों से शिकायत कर रहे थे, लेकिन निगम के जिम्मेदारों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया था। वहीं, क्षेत्र में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने के बाद नगर निगम ने टैंकरों से खानूगांव में पानी तो सप्लाई शुरू करवाई, लेकिन वह भी यहां के कुछ हिस्सों तक ही सीमित है। अब भी कई घरों के लोग दूसरों के यहां से पीने का पानी भरकर लाने को मजबूर हैं।
खानूगांव क्षेत्र के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने के बाद यहां के लोगों में भी इंदौर की तरह बीमारी फैलने का खतरा भी बना हुआ है। इसके बाद भी निगम के स्वास्थ्य अमले ने यहां पर लोगों के स्वास्थ्य की जांच शुरू नहीं करवाई है, जिससे पता चल सके कि यहां भी इंदौर की तरह कोई बीमारी तो नहीं फैल रही है।
जांच रिपोर्ट में बैक्टीरिया मिलने के बाद दिखावे के लिए कुएं की सप्लाई तो काट दी गई, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर जनता को फिर ठगा जा रहा है। निवासियों का आरोप है कि टैंकर केवल खास गलियों में पहुंच रहे हैं, जबकि कुछ इलाके में लोग आज भी दूसरों के घरों के बोरवेल के भरोसे हैं। ऐसे में लोगों को पानी के लिए 200 से 500 मीटर दूर दूसरे लोगों के घर बारेवेल और नर्मदा लाइन से सप्लाई होने वाला पानी भरने के लिए जाना पड़ता है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि नर्मदा नदी के पानी की सप्लाई के लिए उनके घरों में भी लाइन तो डाली गई है, लेकिन पानी उनके क्षेत्र में सप्लाई नहीं हो पाता है। करीब डेढ़ साल से कुएं का पानी पूरी तरह खराब हो चुका था। पहले हम इसी का पानी पीते थे, लेकिन बाद में हालत यह हो गई कि इससे मुंह धोना या कुल्ला करना भी मुश्किल हो गया। साफ दिख रहा था कि गटर का पानी कुएं में मिल रहा है। हमने शिकायतें कीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब दो-तीन दिन से टैंकर भेजे जा रहे हैं। अभी क्षेत्र में किसी के स्वास्थ्य की जांच नहीं की गई- अशोक कुशवाहा, स्थानीय निवासी।
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जांच में ई-कोलाई की पुष्टि हुई है। कुआं ढलान पर है और सीवेज का पानी सीधे उसमें रिस रहा है। कई घर पूरी तरह इसी कुएं पर निर्भर थे। अब लाइन बंद कर दी गई है, लेकिन टैंकर भी हर जगह नहीं पहुंच रहे हैं। - अरशद हुसैन, स्थानीय निवासी।