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भोपाल Master Plan-2047 में 27% हरियाली का दावा, आम नागरिकों के लिए पार्क सिर्फ 0.66%

भोपाल मास्टर प्लान 2047 में 27 प्रतिशत हरित क्षेत्र का दावा है, लेकिन पूरे योजना क्षेत्र में वास्तविक हरियाली करीब 16 प्रतिशत बताई गई। पार्क क्षेत्र म...और पढ़ें

By Anurag MishraEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Mon, 05 Oct 2026 10:14:06 AM (IST)Updated Date: Mon, 05 Oct 2026 10:14:06 AM (IST)
भोपाल Master Plan-2047 में 27% हरियाली का दावा, आम नागरिकों के लिए पार्क सिर्फ 0.66%
भोपाल Master Plan-2047 में 27% हरियाली का दावा। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. मास्टर प्लान में हरित क्षेत्र 27 प्रतिशत दिखाया गया है।
  2. पूरे योजना क्षेत्र में वास्तविक हरियाली 16.22 प्रतिशत बताई।
  3. कुल ग्रीन क्षेत्र में 63 प्रतिशत मौजूदा जंगल है।

पंकज श्रीवास्तव, नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल : पहाड़ों में बसे भोपाल में पिछले एक दशक में हरियाली का ग्राफ तेजी से कम हुआ है। शहर के भीतर लगे हजारों पेड़ों की बली डवलपमेंट के नाम पर चढ़ चुकी है। हाल ही में जारी हुए मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट में शहर के हरित क्षेत्र को 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया है। 1995 के प्लान के मुकाबले इसमें इसमें 11 प्रतिशत बढोतरी की गई है, जो सुकून देती है।

लेकिन इसकी पड़ताल चौंकाने वाली हकीकत बयां कर रही है। 27 फीसद का यह दावा सिर्फ कागजी बाजीगरी बताया जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि शहर के भीतरी क्षेत्रों में आम नागरिकों, बच्चों और बुजुर्गों के टहलने व खेलने के लिए जरूरी बगीचे और पार्क जी-1 एक प्रतिशत भी नहीं हैं। एक लाख हेक्टेयर से अधिक के योजना क्षेत्र में पार्कों का हिस्सा महज 0.66 प्रतिशत 670.93 हेक्टेयर पर सिमट गया है।


आंकड़ों की बाजीगरी

राजपत्र में प्रकाशित भू-उपयोग तालिका 14.2 के अनुसार 27 प्रतिशत का यह आंकड़ा पूरे योजना क्षेत्र का नहीं है। यह सिर्फ भाग-‘अ’ यानी 61,017 हेक्टेयर के दायरे पर आधारित है। यदि पूरे 1,01,690 हेक्टेयर योजना क्षेत्र के हिसाब से देखें, तो वास्तविक हरित क्षेत्र 14.45 प्रतिशत और ईएसजेड मिलाकर केवल 16.22 प्रतिशत ही बैठता है।

जंगलों को नया ग्रीन बताकर गिनाया

योजना में दिखाए गए 14,698 हेक्टेयर ग्रीन क्षेत्र में से अकेले 9,208 हेक्टेयर करीब 63 प्रतिशत हिस्सा नगर वन व वनीकरण जी-5 श्रेणी का है। इसमें वन विभाग के स्वामित्व वाली वह वन भूमि भी शामिल है जो दशकों से पहले से मौजूद है। इसके अलावा भोजताल प्रभाव क्षेत्र-1 और जल-निकायों के बफर जोन को भी ग्रीन एरिया में जोड़कर आंकड़े जुटाए गए हैं।

प्रति व्यक्ति सिर्फ 1.5 वर्ग मीटर खुला स्थान

ड्राफ्ट में 45 लाख की अनुमानित आबादी के हिसाब से योजना बनाई गई है। इस आबादी के मुकाबले 670.93 हेक्टेयर पार्क क्षेत्र का सीधा मतलब है कि एक नागरिक के हिस्से औसतन केवल 1.5 वर्ग मीटर पार्क आ रहा है, जो एक दरी बिछाने जितनी जगह भी नहीं है। योजना में शहर की घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए किसी नए सेंट्रल या रीजनल पार्क का कोई ठोस प्रस्ताव नहीं है। बल्कि भानपुर खंती को पार्क श्रेणी में रखकर वहां गोल्फ कोर्स बनाने की बात कही गई है, जो आम जनता की पहुंच से बाहर है।

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मास्टर प्लान का गणित:

  1. कुल योजना क्षेत्र: 1,01,690 हेक्टेयर
  2. वास्तविक ग्रीन क्षेत्र: 14.45 प्रतिशत (ईएसजेड सहित 16.22 प्रतिशत)
  3. दावा किया गया ग्रीन: 27.03 प्रतिशत (सिर्फ 60 प्रतिशत दायरे की गणना पर)
  4. मौजूदा वन क्षेत्र (जी-5): 9,208 हेक्टेयर (ग्रीन का करीब 63 प्रतिशत)
  5. शहर के लिए पार्क (जी-1): 670.93 हेक्टेयर (सिर्फ 0.66 प्रतिशत)
  6. प्रति व्यक्ति पार्क उपलब्धता: 1.5 वर्ग मीटर

कागजों पर आंकड़े दिखाने के बजाय जमीन पर पार्क दे सरकार

  • मास्टर प्लान 2047 के प्रारूप में 27 प्रतिशत हरियाली का दावा सिर्फ भाग-‘अ’ के 60 प्रतिशत दायरे की बाजीगरी है, जबकि पूरे योजना क्षेत्र में वास्तविक ग्रीन कवर 16 प्रतिशत के आसपास ही बैठता है। सबसे गंभीर बात यह है कि इसमें से 63 प्रतिशत हिस्सा वन विभाग का पहले से मौजूद जंगल है।
  • शहर के आम नागरिकों और बच्चों के लिए पार्क (जी-1) केवल 0.66 प्रतिशत रखे गए हैं, जो प्रति व्यक्ति 1.5 वर्ग मीटर बैठता है। सरकार को चाहिए कि वह पूरे योजना क्षेत्र के सापेक्ष सही आंकड़े सामने रखे, ड्राफ्ट की तालिकाओं के विरोधाभास को सुधारे और गोल्फ कोर्स जैसे विकल्पों के बजाय घनी आबादी के बीच बड़े सार्वजनिक पार्कों के स्थान आरक्षित करे। प्रो. (डा.) एचएम मिश्रा, पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय अभिशासन एवं नगरीय प्रबंधन संस्थान, भोपाल

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