
पंकज श्रीवास्तव, नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल : पहाड़ों में बसे भोपाल में पिछले एक दशक में हरियाली का ग्राफ तेजी से कम हुआ है। शहर के भीतर लगे हजारों पेड़ों की बली डवलपमेंट के नाम पर चढ़ चुकी है। हाल ही में जारी हुए मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट में शहर के हरित क्षेत्र को 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया है। 1995 के प्लान के मुकाबले इसमें इसमें 11 प्रतिशत बढोतरी की गई है, जो सुकून देती है।
लेकिन इसकी पड़ताल चौंकाने वाली हकीकत बयां कर रही है। 27 फीसद का यह दावा सिर्फ कागजी बाजीगरी बताया जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि शहर के भीतरी क्षेत्रों में आम नागरिकों, बच्चों और बुजुर्गों के टहलने व खेलने के लिए जरूरी बगीचे और पार्क जी-1 एक प्रतिशत भी नहीं हैं। एक लाख हेक्टेयर से अधिक के योजना क्षेत्र में पार्कों का हिस्सा महज 0.66 प्रतिशत 670.93 हेक्टेयर पर सिमट गया है।
राजपत्र में प्रकाशित भू-उपयोग तालिका 14.2 के अनुसार 27 प्रतिशत का यह आंकड़ा पूरे योजना क्षेत्र का नहीं है। यह सिर्फ भाग-‘अ’ यानी 61,017 हेक्टेयर के दायरे पर आधारित है। यदि पूरे 1,01,690 हेक्टेयर योजना क्षेत्र के हिसाब से देखें, तो वास्तविक हरित क्षेत्र 14.45 प्रतिशत और ईएसजेड मिलाकर केवल 16.22 प्रतिशत ही बैठता है।
योजना में दिखाए गए 14,698 हेक्टेयर ग्रीन क्षेत्र में से अकेले 9,208 हेक्टेयर करीब 63 प्रतिशत हिस्सा नगर वन व वनीकरण जी-5 श्रेणी का है। इसमें वन विभाग के स्वामित्व वाली वह वन भूमि भी शामिल है जो दशकों से पहले से मौजूद है। इसके अलावा भोजताल प्रभाव क्षेत्र-1 और जल-निकायों के बफर जोन को भी ग्रीन एरिया में जोड़कर आंकड़े जुटाए गए हैं।
ड्राफ्ट में 45 लाख की अनुमानित आबादी के हिसाब से योजना बनाई गई है। इस आबादी के मुकाबले 670.93 हेक्टेयर पार्क क्षेत्र का सीधा मतलब है कि एक नागरिक के हिस्से औसतन केवल 1.5 वर्ग मीटर पार्क आ रहा है, जो एक दरी बिछाने जितनी जगह भी नहीं है। योजना में शहर की घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए किसी नए सेंट्रल या रीजनल पार्क का कोई ठोस प्रस्ताव नहीं है। बल्कि भानपुर खंती को पार्क श्रेणी में रखकर वहां गोल्फ कोर्स बनाने की बात कही गई है, जो आम जनता की पहुंच से बाहर है।
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