
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 23 मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था, लेकिन भोपाल नगर निगम की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही। दिखावे की कागजी कार्रवाई के बीच राजधानी की जनता आज भी मटमैला पानी पीने को मजबूर है। 17 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है, नलों से गंदा पानी आ रहा है, जो किसी भी वक्त बड़े ''जल-कांड'' को दावत दे सकता है। निगम ने 30 दिसंबर से अभियान शुरू कर अब तक करीब 4000 नमूनों का ढेर तो लगा दिया है, लेकिन असलियत डरावनी है।
शहर के तीन इलाकों से लिए गए चार नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हो चुकी है। यह वही बैक्टीरिया है, जो आंतों में संक्रमण और जानलेवा बीमारियों का कारण बनता है। चौंकाने वाली बात यह है कि शुरुआती रिपोर्ट सार्वजनिक करने के बाद अब निगम ने जांच रिपोर्ट को ''गोपनीय'' बना दिया है। अब निगम द्वारा पानी के नमूने तो लिए जा रहे हैं और उसकी संख्या की जानकारी भी दी जा रही है, लेकिन अब जांच रिपोर्ट जारी नहीं की जा रही है।
शहर के पुराने हिस्सों और घनी बस्तियों में जल प्रदाय की पाइपलाइनें दशकों पुरानी हो चुकी हैं। ये पाइपलाइनें खुली नालियों और गंदगी के ढेर के बीच से होकर गुजर रही हैं। शहर में नवाब कालोनी, प्रेमनगर, काजी कैंप, डीआइजी बंगला सहित कई हिस्सों में अब भी गंदा पानी सप्लाई किया जा रहा है। साथ ही पानी का लीकेज सुधारने और सीएम व महापौर हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का निराकरण किया जा रहा है, लेकिन शहर के लोगों का कहना है कि यह सब दिखावे की कार्रवाई है।
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जमीनी स्तर पर कुछ भी बदलाव नजर नहीं आ रहा है। शहर के कई हिस्सों में लोग अब भी गंदा पानी सप्लाई होने की बात कह रहे हैं। शहर में जगह-जगह नालियों में भरी गंदगी के बीच पेयजल पाइपलाइन निकल रही हैं, जिनमें से अधिकांश लाइनें पुरानी हैं। वहीं लीकेज की समस्याएं अब भी बनी हुई है। शुरुआत में आता है गंदा पानी घरों में सुबह जब पानी आता है तो शुरुआत में तो मटमैला पानी ही निकलता है। लंबे समय से यही स्थिति बनी हुई है। हम इसको लेकर निगम में भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई हो रही है। इंदौर हादसे के बाद भी नगर निगम द्वारा जो कार्रवाई की जा रही है वह सिर्फ दिखावे के लिए हो रही है। पानी सप्लाई की व्यवस्था में अब भी कोई बदलाव नहीं आया है। - आबिद खान, रहवासी नवाब कॉलोनी।
गंदगी में डूबी हैं पाइपलाइन नगर निगम के लोग आते हैं, बोतल में पानी भरते हैं और चले जाते हैं। उसके बाद क्या हुआ, कोई नहीं बताता। हमारे नलों में आज भी गंदा पानी आ रहा है जिसे हम कपड़े से छानकर और उबालकर पीने को मजबूर हैं। पेयजल सप्लाई होने वाली पाइपलाइन अब भी गंदे पानी डूबी हुई हैं, उन्हें ठीक करने के बजाय सिर्फ नमूने लेने का नाटक हो रहा है। घर के छोटे बच्चों के बीमार होने का डर बना रहता है- सुल्ताना बेगम, रहवासी, काजी कैंप।