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अनुज मैना, नईदुनिया, भोपाल। नगर निगम के स्लाटर हाउस में गोकशी की पुष्टि के बाद कार्रवाई के नाम पर शहर सरकार भाग रही है। स्थिति ऐसी बन रही है कि अब विपक्ष के साथ भाजपा के जनप्रतिनिधि भी नेताओं-अधिकारियों पर सवाल उठाने लगे हैं। सत्ता पक्ष के सांसद और विधायक इसे पिछले कार्यकाल की तुलना में वर्तमान प्रबंधन की विफलता बता रहे हैं और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं, विपक्ष ने इसे छोटे व्यापारियों का हक छीनकर किसी विशेष को लाभ पहुंचाने का परिणाम बताया है।
पूरे मामले में सबसे विवादित पहलू निगम द्वारा की गई कार्रवाई है। घटना के 11 दिन बाद भी वेटनरी डॉक्टर और स्लाटर हाउस में तैनात छोटे कर्मचारियों के अलावा अन्य किसी भी जिम्मेदार पर कार्रवाई नहीं की गई है। शहर के सांसद, मंत्री और विधायकों ने इसे "दिखावा" करार देते हुए उच्च अधिकारियों को बचाने का प्रयास बताया है। सरकार द्वारा जांच के आदेश और दोषियों को फांसी जैसी कड़ी सजा की मांग के बीच, अब यह स्पष्ट हो गया है कि इस मामले की गूंज न केवल निगम बल्कि शासन स्तर तक पहुंच चुकी है। जिम्मेदारों पर कार्रवाई न होने की सूरत में अब मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की उम्मीद की जा रही है।
जब मैं महापौर था, तब स्लाटर हाउस चालू करने के लिए मुझ पर भी भारी दबाव था। कुछ कंपनियों को काम दिलाने के लिए प्रेशर बनाया जा रहा था, लेकिन मैं किसी के प्रेशर में नहीं आया और अपने कार्यकाल में इसे मंजूर नहीं किया। मौजूदा एमआईसी में यह किन परिस्थितियों में चालू हुआ है और किन लोगों ने इसकी अनुमति किस नियम से दी है, सरकार इसकी जांच करवा रही है। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। - आलोक शर्मा, सांसद एवं पूर्व महापौर
स्लाटर हाउस में गोकशी करने वाले आरोपितों को फांसी की सजा होनी चाहिए। साथ ही इस मामले में जो भी अधिकारी-कर्मचारी जिम्मेदार हैं उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। - विश्वास सारंग, मंत्री एवं विधायक, नरेला
स्लाटर हाउस का संचालन किसने असलम चमड़ा को सौंपा था ये सभी को पता है। सालों से स्लाटिंग का काम करते आ रहे छोटे-छोटे व्यापारियों का काम छीन कर ये पूरा स्लाटर हाउस ही निगम ने असलम को सौंप दिया था। इस मामले में सिर्फ एक वेटनरी डॉक्टर को छोड़ दें तो किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले में तो स्वयं मुख्यमंत्री को संज्ञान लेना चाहिए, लेकिन वे इस मामले में अनजान बने हुए हैं। - आरिफ मसूद, विधायक, मध्य विधानसभा