
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: जहांगीराबाद स्थित बूचड़खाने में सामने आए गौकशी मामले में अब पुलिस की जांच दूसरे शहरों से गौमांस की तस्करी के मोड़ पर पहुंच गई है। शुरूआती जांच में सामने आया है कि बूचड़खाने में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज में कहीं भी गौवंश नजर नहीं आ रहा, जबकि अंदर भैंसें ही दिखाई दी गई हैं।
साथ ही बूचड़खाने में बैतूल और जबलपुर के कई संदिग्ध लोडिंग वाहन भी दिखे हैं, जिससे शंका है कि वहां से गौमांस लाकर यहां पैकिंग की जाती थी और फिर यहां से मुंबई के रास्ते विदेशों में सप्लाई हो रही थी।
मामले की जांच कर रही जहांगीराबाद पुलिस ने एक महीने के सीसीटीवी रिकॉर्ड की डीवीआर जब्त कर ली है। पुलिस सिर्फ घटना वाले दिन तक सीमित नहीं है, बल्कि घटना से पहले के कई दिनों के फुटेज को खंगाला जा रहा है। साथ ही मांस का परिवहन करने वाले कुछ संदिग्धों को भी जांच के घेरे में ला रहे हैं।
जहांगीराबाद पुलिस के अनुसार सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच करने पर बैतूल और जबलपुर नंबर के कई लोडिंग वाहन बूचड़खाने परिसर में आते-जाते नजर आए हैं। इन वाहनों की आवाजाही को लेकर पुलिस को संदेह है कि इन्हीं के माध्यम से गौमांस भोपाल लाया गया।
आशंका यह भी जताई जा रही है कि यह मांस सीधे उपभोग के लिए नहीं, बल्कि पैकिंग कर आगे भेजने के लिए लाया जाता था। इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि पैक किया गया गौमांस मुंबई के रास्ते विदेशों तक सप्लाई किया जा रहा था। मांस के परिवहन में शाहवेज जिद्दी, निजाम खान और भूरा नामक युवकों का नाम अब तक सामने आया है। पुलिस उनकी जांच में भी जुटी है।
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उधर पुलिस जांच में सामने आया है कि बूचड़खाने का संचालन करने वाली लाइव स्टॉक कंपनी में असलम के अलावा दो अन्य पार्टनर भी शामिल हैं, जो मध्यप्रदेश के बाहर के रहने वाले हैं। इन पार्टनरों की भूमिका को लेकर पुलिस को संदेह है कि वे केवल नाम के साझेदार नहीं, बल्कि गौमांस की सप्लाई और आगे के नेटवर्क से सीधे जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस के अनुसार दोनों पार्टनरों के पते और दस्तावेज दूसरे राज्यों के मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि गौमांस की तस्करी में उनकी अहम भूमिका रही है। जहांगीराबाद पुलिस ने दोनों की पहचान कर ली है और संभावित ठिकानों पर दबिश की तैयारी की जा रही है।