
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से मौतों के बाद प्रदेशभर में मध्य प्रदेश सरकार की जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर नईदुनिया द्वारा शुरू किए गए हर बूंद हो स्वच्छ और हर घूट हो स्वस्थ अभियान के बाद राज्य सरकार ने भी स्वच्छ जल अभियान आरंभ कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जल सुरक्षा, जल संरक्षण और जल सुनवाई उद्देश्य से प्रांतव्यापी स्वच्छ जल अभियान का शनिवार को शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री शनिवार शाम सागर से लौटने के बाद राज्य विमानतल के सभा कक्ष में उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। स्वच्छ जल अभियान दो चरणों में चलेगा। प्रथम चरण 10 जनवरी से शुरू होकर 28 फरवरी तक और द्वितीय एक से 31 मार्च के बीच चलेगा। प्रदेश में हर मंगलवार को पेयजल को लेकर सुनवाई आयोजित की जाएगी।
इस बैठक दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी आम नागरिकों की पेयजल समस्या के लिए की गई जल सुनवाई व्यवस्था को अधिकारी गंभीरता से लें। मुख्यमंत्री ने कहा है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में स्वच्छ जलप्रदाय सुनिश्चित किया जाए। पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच हो, दूषित होने पर वैकल्पिक व्यवस्था करें। किसी भी स्थिति में दूषित पेयजल की आपूर्ति न हो। यह बड़ी चुनौती है, लेकिन गंभीरता से सामना करें, जिससे देश में एक आदर्श प्रस्तुत हो। घर-घर स्वच्छ जल पहुंचाएं।
साथ ही उन्होंने कहा कि इस कार्य में नगरीय निकाय विभाग द्वारा एप का उपयोग प्रारंभ किया जाना सराहनीय है। स्वच्छ पेयजल आपूर्ति में ढिलाई बरते जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल भी वीसी में उपस्थित रहे। सभी महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष, कमिश्नर, कलेक्टर, कमिश्नर नगर निगम, सीईओ जिला पंचायत के साथ सभी अधिकारी एवं नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधि वर्चुअली शामिल हुए। अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे ने प्रेजेंटेशन से अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपभोक्ताओं को मामूली शुल्क पर जल की गुणवत्ता की जांच की सुविधा भी प्राप्त होगी।
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अभियान में समस्त जल शोधन यंत्र और पेयजल संग्रहण टंकियों की सफाई होगी। जीआईएस मैप आधारित एप से निगरानी होगी। पेयजल पाइप लाइन में दूषित मिश्रण को रोकने का काम होगा। जीआइएस मैप पर वाटर पाइप लाइन व सीवेज पाइप लाइन की मैपिंग होगी, इंटर प्वाइंट सेक्शन का चिह्नांकन और लीकेज की जांच की जाएगी।
समस्त पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता का परीक्षण, एसटीपी की नियमित निगरानी, हर मंगलवार को जल सुनवाई, 181 पर पेयजल संबंधी शिकायतों को दर्ज करने की विशेष व्यवस्था और पेयजल समस्या से संबंधित आवेदन पत्र का निराकरण समय-सीमा में कर आवेदक को बताया जाएगा।