
डिजिटल डेस्क: इंदौर में दूषित और गंदा पानी पीने से अब तक करीब डेढ़ दर्जन लोगों की मौत को लेकर कांग्रेस ने मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मुख्य विपक्षी दल ने इसे सरकार की लापरवाही और प्रशासनिक विफलता का उदाहरण बताते हुए कहा कि इस घटना से ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘हर घर जल’ योजना की वास्तविकता सामने आ गई है।
कांग्रेस ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि जिस भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से लोगों की मौतें हुईं, वहां की पुरानी पाइपलाइन बदलने की स्वीकृति 22 जुलाई 2022 को ही मिल चुकी थी, लेकिन कथित भ्रष्टाचार के कारण अब तक यह कार्य नहीं कराया गया।
कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने गुरुवार को पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 100 लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने दावा किया कि ‘स्वच्छ भारत अभियान’ में आठ बार प्रथम स्थान पाने वाले शहर इंदौर में पाइपलाइनों में सीवेज का पानी मिल रहा है।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा की तथाकथित ट्रिपल इंजन सरकार में ‘हर घर जल’ योजना अब ‘हर घर मल’ योजना में बदल गई है। उन्होंने दस्तावेज दिखाते हुए सवाल किया कि जब पुरानी पाइपलाइन बदलने के ठेके को 2022 में मंजूरी मिल चुकी थी तो काम क्यों नहीं हुआ? क्या सरकार किसी बड़े कमीशन का इंतजार कर रही थी?
उन्होंने यह भी कहा कि एशियन डेवलपमेंट बैंक से वर्ष 2003 में भोपाल, इंदौर और ग्वालियर की जलापूर्ति सुधार परियोजनाओं के लिए 200 मिलियन डॉलर का ऋण मिला था। ऐसे में इस राशि के उपयोग का तत्काल ऑडिट कराया जाना चाहिए।
हमारे सवाल:
⦁ भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर को कवर करने के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक ने 2003 में 200 मिलियन डॉलर का कर्ज दिया था, आखिर उस पैसे का क्या हुआ?
⦁ इंदौर में जो दूषित पानी से मौतें हुई, उन मामलों में वाटर सैंपल और प्रभावित नागरिकों के स्टूल सैंपल की जांच हुई या नहीं?
— Congress (@INCIndia) January 8, 2026
कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि दूषित पानी से हुई मौतों के मामलों में जल सैंपल और प्रभावित नागरिकों के स्टूल सैंपल की जांच हुई या नहीं। क्या सैंपल में हैजा के बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है? यदि हैजा पाया गया तो क्या सरकार ने इसे इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के तहत नोटिफाई किया और इसकी जानकारी केंद्र सरकार व विश्व स्वास्थ्य संगठन को दी गई?
हर घर जल योजना पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए गए, लेकिन यह 'हर घर जल योजना' नहीं, बल्कि 'हर घर मल योजना' है।
लोगों के घरों में जो पानी आ रहा था, उसमें मल था। इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है, क्योंकि वे ही लच्छेदार बातें करते हैं।
इस काम के लिए Asian… pic.twitter.com/sCIPBPAO8A
— Congress (@INCIndia) January 8, 2026
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी पूछा कि जब BJP सरकार ने आंखें मूंद रखी थीं, तब शहर के पीने के पानी को सीवेज से दूषित कैसे होने दिया गया। पवन खेड़ा ने पूछा, "नागरिकों की बार-बार की चेतावनियों को क्यों नजरअंदाज किया गया, जिससे हजारों लोगों की जान जोखिम में पड़ गई?
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पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि सवाल पूछने पर गाली-गलौज की जाती है, जबकि मुख्यमंत्री उत्सवों में व्यस्त रहते हैं। उन्होंने गुजरात के गांधीनगर में टाइफाइड फैलने, दिल्ली में खराब जल गुणवत्ता और देशभर में मिलावट के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।