
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: इंदौर के भागीरथपुरा कांड को लेकर कांग्रेस का रुख लगातार आक्रामक होता जा रहा है। लंबे समय से इस पूरे मामले पर मौन रहे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अब खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए।
दिग्विजय सिंह ने लिखा कि इंदौर उनके बचपन का शहर है। शुरुआत में जब 2-4 मौतें हुईं, तब किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। जैसे-जैसे मौतों की संख्या बढ़ी, वैसे-वैसे जिम्मेदारी तय करने के बजाय एक-दूसरे पर दोष मढ़ा जाने लगा। उन्होंने कहा कि मंत्री अफसरों को दोष दे रहे हैं, अफसर मेयर को और मेयर पूरी व्यवस्था को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि पूरा मामला आपसी आरोप-प्रत्यारोप में उलझ गया है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इंदौर के प्रभारी स्वयं मुख्यमंत्री हैं, जो हर दूसरे दिन शहर आते हैं, लेकिन उनसे कोई जवाबदेही तय नहीं की जा रही। दिग्विजय सिंह ने पूछा कि आखिर सिर्फ मौत का मुआवजा देकर चुप्पी क्यों साध ली गई। उन्होंने इस हादसे की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि इसकी जांच हाई कोर्ट के जज से कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि मुआवजे से जिंदगियां वापस नहीं आतीं, इसलिए पर्दा डालने के बजाय जिम्मेदारी तय कर दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।
इसी बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय ‘सुदर्शन’ पहुंचने को लेकर सवाल खड़े किए। पटवारी ने कहा कि क्या अब कलेक्टर की प्राथमिकता भागीरथपुरा के पीड़ितों के बजाय संघ और संगठन की संतुष्टि हो गई है।
इंदौर मेरे बचपन का शहर, मेरे राज्य का सबसे विकसित शहर और देश का सबसे स्वच्छ शहर है। राज्य की आर्थिक राजधानी मे इसकी गिनती होती है और उसी इंदौर शहर में १८ लोग गंदा पानी पीने से मर जाते हैं।
आँकड़ा जब तक २/४ मौत का रहा किसी ने साँस नहीं ली लेकिन मौतों की गिनती बढ़ने लगी तो…
— Digvijaya Singh (@digvijaya_28) January 8, 2026
उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर का प्रशासन अब जनता के प्रति नहीं, बल्कि संघ के प्रति जवाबदेह होता जा रहा है। जीतू पटवारी ने सवाल किया कि क्या संवैधानिक पद अब आरएसएस के आदेशों का पालन केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा शासन में प्रशासन की स्वतंत्रता समाप्त हो गई है।