
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में मुगल शासक 'बाबर' पर आधारित नई पुस्तक को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू संगठनों के विरोध और संस्कृति विभाग की आपत्ति के बाद पुस्तक 'बाबर: द क्वेस्ट फॉर हिंदुस्तान' पर प्रस्तावित परिचर्चा को निरस्त कर दिया गया। अब इस मामले में नया मोड़ आया है; पुस्तक के लेखक आभास मलदहियार ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
लेखक आभास मलदहियार ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम का उद्देश्य बाबर का महिमामंडन करना नहीं, बल्कि “भोपाल वसीयतनामा” नामक एक ऐतिहासिक जालसाजी का पर्दाफाश करना था। लेखक के अनुसार, 19वीं शताब्दी के इस फर्जी दस्तावेज को अक्सर बाबर की वसीयत के रूप में पेश किया जाता है, ताकि उसे हिंदुओं के प्रति सहिष्णु दिखाया जा सके।
उन्होंने बताया कि 60 के दशक में वाराणसी के प्रो. रामगोपाल पांडेय के लेखों के माध्यम से यह दावा फैलाया गया था कि भोपाल रियासत के अभिलेखों में बाबर का एक फरमान है, जिसमें उसने हुमायूं को अयोध्या, काशी और ग्वालियर के मंदिरों में दान देने का निर्देश दिया था। लेखक का दावा है कि इतिहास की मुख्यधारा में इस तथ्य को कभी मान्यता नहीं मिली क्योंकि वह फरमान कभी अस्तित्व में ही नहीं था।
बता दें कि भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन 9 से 11 जनवरी तक भारत भवन में हुआ था। इसमें संस्कृति विभाग भी आयोजकों में शामिल था। हिंदू उत्सव समिति जैसे संगठनों ने इस सत्र का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया था कि यह पुस्तक आक्रांता बाबर का महिमामंडन करती है। संगठनों ने न केवल सत्र को रद्द करने की मांग की, बल्कि लेखक और आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए तहरीर भी दी थी।
विवाद बढ़ता देख संस्कृति विभाग ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद अंततः सत्र को रद्द कर दिया गया। लेखक का कहना है कि विरोध करने वालों ने किताब का एक पन्ना भी नहीं पढ़ा और संस्कृति विभाग इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मूकदर्शक बना रहा।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में आभास ने तीखी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जो लोग बाबर का विरोध करने का दावा करते हैं, वे अनजाने में उन लोगों की मदद कर रहे हैं जिन्होंने इस वैचारिक संघर्ष के गलत औजार तैयार किए हैं। उन्होंने पत्र में लिखा कि विरोध के कारण उस बौद्धिक अवसर को नष्ट कर दिया गया, जिसके जरिए मार्क्सवादी ऐतिहासिक जालसाजी को दुनिया के सामने उजागर किया जा सकता था। लेखक ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे इस विषय पर संज्ञान लें ताकि इतिहास और सभ्यता पर शोध करने वाले विद्वानों के मार्ग में केवल शोर मचाने वाले लोग बाधा न बन सकें।
आभास मलदहियार एक पेशेवर वास्तुकार (Architect) होने के साथ-साथ 'इंडियन हिस्टोरिकल एंड कल्चरल रिसर्च' के संस्थापक सदस्य हैं। वे इतिहास को नए दृष्टिकोण से देखने वाली चर्चित पुस्तकों के लेखक रहे हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में 'मोदी अगेन', 'बाबर: द चेसबोर्ड किंग' और 'हिटलर: द प्रोक्लेम्ड मसीहा ऑफ पेलेस्टेनियन कॉज' शामिल हैं। उनकी लेखनी अक्सर ऐतिहासिक मिथकों को चुनौती देने के लिए जानी जाती है।
भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल एक गैर-राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन है। यहां हमारी मुख्य चिंता अतिथि वक्ताओं की सुरक्षा को लेकर रही। भोपाल पुलिस ने हमें वहां तोड़फोड़ और लेखक पर संभावित शारीरिक हमले की सूचना दी थी, इसके बाद हमें आभास मलदहियार का पूर्व निर्धारित सत्र रोकना पड़ा था - राघव चंद्रा, संयोजक बीएलएफ।