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Cough Syrup Case: श्रीसन फार्मा को कच्चा माल सप्‍लाय करने वाले डाॅ. प्रवीण सोनी भी आएंगे ईडी के घेरे में

ईडी का मानना है कि विनिर्माण लागत कम करने के लिए कंपनी ने इंडस्ट्री ग्रेड का कच्चा माल उपयोग किया, वह भी बिना जांच के। ये सामान बिना बिल के नकद में खर...और पढ़ें

By Navodit SaktawatEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 04 Dec 2025 10:01:10 PM (IST)Updated Date: Thu, 04 Dec 2025 10:04:33 PM (IST)
Cough Syrup Case: श्रीसन फार्मा को कच्चा माल सप्‍लाय करने वाले डाॅ. प्रवीण सोनी भी आएंगे ईडी के घेरे में
कफ सीरप केस में नया खुलासा।

HighLights

  1. जी. रंगनाथन की दो करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच होगी।
  2. इस कार्रवाई के बाद फिर जांच का दायरा बढ़ाएगी ईडी।
  3. ईडी प्रवीण सोनी को रिमांड पर पूछताछ कर सकती है।

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया.भोपाल। मध्य प्रदेश के तीन जिलों छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल में विषाक्त कफ सीरप 'कोल्ड्रिफ' से 24 बच्चों की मौत के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), चेन्नई ने जांच तेज कर दी है। कोल्ड्रिफ की निर्माता कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के मालिक जी. रंगनाथन की दो करोड़ रुपये कीमत वाले दो फ्लैट ईडी ने अस्थायी तौर पर अटैच कर लिए हैं।

अब श्रीसन फार्मास्युटिकल्स को कच्चा माल आपूर्ति करने वाले, तमिलनाडु औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारी, बच्चों को सीरप लिखने वाले परासिया (छिंदवाड़ा) के प्रवीण सोनी व अन्य ईडी के रडार पर हैं। ईडी प्रवीण सोनी को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है। ईडी मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और एंटी करप्शन ब्यूरो तमिलनाडु में दर्ज एफआइआर के आधार पर मामले की जांच कर रही है।


जांच एजेंसी ने आरोपितों से जुड़े 10 स्थानों पर छापेमारी भी की थी, जिसमें कई आपत्तिजनक दस्तावेज मिले थे। कुछ डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए थे। इनमें मिले तथ्यों के आधार पर आरोपितों से पूछताछ की जाएगी। ईडी की जांच में भी सामने आया है कि कंपनी ने कफ सीरप बनाने के लिए फार्मा ग्रेड की जगह इंडस्ट्री ग्रेड का प्रोपेलीन ग्लायकाल उपयोग किया था।

ईडी का मानना है कि विनिर्माण लागत कम करने के लिए कंपनी ने इंडस्ट्री ग्रेड का कच्चा माल उपयोग किया, वह भी बिना जांच के। ये सामान बिना बिल के नकद में खरीदे जा रहे थे ताकि रिकार्ड न बनाए जा सकें। ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि तमिलनाडु औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारी जी. रंगनाथन के लगातार संपर्क में थे। उन्होंने कंपनी का वार्षिक निरीक्षण तक नहीं किया।