कागजों पर प्रतिबंध, सड़कों पर मौत... 2017 के NGT आदेश के बाद भी MP में धड़ल्ले से बिक रहा खूनी मांझा
चाइनीज मांझे के संबंध में वर्ष 2017 में एनजीटी के आदेश का परिपालन कराने के लिए पर्यावरण विभाग की ओर से फरवरी 2024 में राजपत्र में अधिसूचना जारी की गई ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 13 Jan 2026 10:35:41 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Jan 2026 10:35:41 PM (IST)
MP में धड़ल्ले से बिक रहा खूनी मांझाHighLights
- आदेश उल्लंघन पर BNS धारा 223 के तहत 6 माह की जेल होगी
- राजपत्र के अनुसार मांझे की बिक्री और उपयोग पूरी तरह वर्जित
- 2017 से ही सिंथेटिक और नायलॉन धागों पर लगा है स्थायी बैन
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। चाइनीज मांझे के संबंध में वर्ष 2017 में एनजीटी के आदेश का परिपालन कराने के लिए पर्यावरण विभाग की ओर से फरवरी 2024 में राजपत्र में अधिसूचना जारी की गई थी। इसमें न सिर्फ मांझा बेचने वालों पर, बल्कि निर्माण, बिक्री, भंडारण, खरीद, आपूर्ति, आयात और उपयोग पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। पुलिस मुख्यालय की तरफ से भी 23 दिसंबर 2025 को सभी पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर शासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन कराने के लिए कहा गया था। इसके बाद भी पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया।
इंदौर की घटना ने बढ़ाई सक्रियता
मांझे से गला कटने के बाद इंदौर में एक व्यक्ति की मौत और प्रदेश में कई लोगों के गला कटने के बाद अब पुलिस-प्रशासन सक्रिय हुआ है। पर्यावरण विभाग द्वारा जारी आदेश का पालन कराने में पहली जिम्मेदारी कलेक्टरों को दी गई है, पर कुछ जिलों में ही कलेक्टरों ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के अंतर्गत कार्रवाई करने के पुलिस को निर्देश दिए हैं। शासकीय आदेश का पालन नहीं करने पर यह धारा लगाई जाती है, जिसमें अधिकतम छह माह की सजा का भी प्रविधान है।
सिंथेटिक धागों पर एनजीटी का सख्त रुख
बता दें कि एनजीटी की नेशनल बेंच ने वर्ष 2017 में एक याचिका की सुनवाई करते हुए चीनी मांझा सहित नायलान, प्लास्टिक या किसी अन्य सिंथेटिक पदार्थ से बने पतंग उड़ाने वाले धागे एवं अन्य धागे, जिनमें सिंथेटिक पदार्थ लपेटा गया और नॉन-बायोडिग्रेडेबल (अपने आप नष्ट नहीं होने वाला) प्रतिबंधित किया गया था। शासन और प्रशासन अब इन नियमों को सख्ती से लागू करने की कोशिश में जुटा है ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
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