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एमपी के लोगों को बड़ा झटका... 15% तक बढ़ सकता है बिजली बिल, जानें नया बिलिंग सिस्टम

MP Electricity Bill New Rules 2026: प्रदेश भर के बिजली उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ेगा। भोपाल में ही 33 हजार से ज्यादा उपभोक्ता इसके दायरे में होंगे। इन...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 12 Jan 2026 06:40:26 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Jan 2026 06:40:26 PM (IST)
एमपी के लोगों को बड़ा झटका... 15% तक बढ़ सकता है बिजली बिल, जानें नया बिलिंग सिस्टम
MP Electricity Bill New Rules 2026: 15% तक बढ़ सकता है बिजली बिल, AI Generated

HighLights

  1. बिजली बिल अब KW के बजाय KVA (अपेरेंट पावर) के आधार पर वसूला जाएगा
  2. खराब वायरिंग और पुराने उपकरणों के कारण बिल में 15% तक की होगी वृद्धि
  3. पावर फैक्टर सुधारना और ग्रिड पर अनावश्यक लोड को कम करना है लक्ष्य

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। बिजली बिल (MP Electricity Bill New Rules 2026) अब किलोवाट की जगह किलो वोल्ट एंपियर के आधार पर बनाए जाएंगे। यह फैसला मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिलिंग फॉर्मूले में परिवर्तन करते हुए लिया है। इस फॉर्मूले से बिल जारी करने का असर यह होगा कि अनुपयोगी बिजली का बिल बनेगा और उपभोक्ता से वसूली की जाएगी। प्रदेश भर के बिजली उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ेगा। भोपाल में ही 33 हजार से ज्यादा उपभोक्ता इसके दायरे में होंगे। इनमें बड़े संस्थान और उद्योग उपभोक्ता भी शामिल हैं। इससे इनका बिजली बिल 15 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। मप्र विद्युत नियामक आयोग को कंपनी ने 2026-27 के लिए प्रस्तावित टैरिफ में इसे प्रस्तावित किया है।

KVA आधारित बिलिंग का गणित और उपभोक्ताओं पर प्रभाव

केवीए को प्रकट शक्ति यानी अपेरेंट पावर भी कहते हैं। ये आपूर्ति की गई कुल बिजली है। इस तरह से समझें, केवीए दरअसल किलोवाट बिजली की वास्तविक खपत को बताता है, जबकि किलो-वोल्ट एम्पीयर लॉस वाली बिजली का भी आकलन करता है। यदि पुराने उपकरण, वायरिंग से परिसर में बिजली का तकनीकी लॉस होता है तो वह भी उपभोक्ताओं के बिल में जुड़ जाएगी। अभी एचटी उपभोक्ताओं के बिल इससे बनेंगे, धीरे-धीरे अन्य उपभोक्ताओं को इसके दायरे में लाया जाएगा। भोपाल जिले में फिलहाल 33 हजार एचटी उपभोक्ता हैं।


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लाइन लॉस घटाने पर खर्च हुए तीन हजार करोड़

भोपाल में बिजली लाइन के तकनीकी लॉस को घटाने के लिए 15 साल में तीन हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। एचवीडीएस सिस्टम विकसित करने से लेकर नई लाइन बिछाने, फीडर सेपरेशन समेत ट्रांसफार्मर-सब स्टेशन की क्षमता वृद्धि तक की गई। ये औसत 15 प्रतिशत है जो बिलिंग सिस्टम बदलने से ग्राहक की जेब पर शिफ्ट हो जाएगा।

लापरवाही और पुराने उपकरणों से बढ़ेगा बिल का बोझ

केवीए आधारित बिलिंग से वही उपभोक्ता लाभ में रहेंगे जो सही तरीके से बिजली उपयोग करेंगे। लापरवाही करने वालों का बिल बढ़ेगा। किसी परिसर में यदि बिजली आपूर्ति करने वाला ट्रांसफार्मर, वायरिंग, उपकरण नए व बेहतर हैं तो किलोवाट व केवीए समान रहेंगे। बिल में अंतर भी नहीं होगा, लेकिन पुराने उपकरण, पुरानी वायरिंग होने पर बिजली का पावर फैक्टर खराब होगा। केवीए और किलोवाट में अंतर होगा और बिल बढ़ेगा।

बिजली कंपनी को लाभ और केवीए पर शिफ्ट होने का उद्देश्य

बिजली कंपनी को इससे कई लाभ होंगे, जैसे लाइन लॉस कम होगा, ट्रांसफार्मर व केबल पर कम दबाव पड़ेगा और सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ेगी। बिल को केवीए पर शिफ्ट करने का मुख्य उद्देश्य पावर फैक्टर सुधारना, ग्रिड पर अनावश्यक लोड कम करना, बिजली आपूर्ति को अधिक कुशल बनाना और उपभोक्ता को तकनीकी रूप से जिम्मेदार बनाना है।

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