MP के किसानों की खुलेगी किस्मत, सरकार शुरु करने जा रही है क्लस्टर प्रोजेक्ट, आमदनी में होगी 40% की बढ़ोतरी
MP Farmers: भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के वादे को हकीकत में बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। हॉर्टिकल्चर विभाग के माध्यम से राज्य में 'क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' (Cluster Development Project) शुरू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसानों की आमदनी में 30 से 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी करना है।
Publish Date: Mon, 12 Jan 2026 06:34:33 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Jan 2026 06:34:33 PM (IST)
MP के किसानों की खुलेगी किस्मत। (Image Source: AI-Generated)HighLights
- एमपी के किसानों के लिए खुशखबरी
- हॉर्टिकल्चर विभाग का बड़ा प्लान
- इस प्रोजेक्ट से 40% तक बढ़ेगी कमाई
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के वादे को हकीकत में बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। हॉर्टिकल्चर विभाग के माध्यम से राज्य में 'क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' (Cluster Development Project) शुरू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसानों की आमदनी में 30 से 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी करना है। इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत सागर जिले से होगी, जहां आलू, प्याज और टमाटर जैसी सब्जियों पर फोकस किया जाएगा।
खेत पर ही बिकेगी उपज, बिचौलियों का खेल खत्म
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब किसानों को अपनी फसल लेकर मंडियों के चक्कर नहीं काटने होंगे। बाहरी बड़ी कंपनियां सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचेंगी और वहां से उपज की खरीद करेंगी। इससे न केवल परिवहन का खर्च बचेगा, बल्कि किसानों को उनकी फसल का बेहतर और उचित दाम भी मिल सकेगा।
₹25 करोड़ का निवेश और भारी सब्सिडी
सरकार प्रत्येक क्लस्टर के विकास पर करीब 25 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है। इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा किसानों को सशक्त बनाने में उपयोग होगा:
- 20 करोड़ रुपये का अनुदान: किसानों को आधुनिक संसाधन जैसे ट्रैक्टर, कोल्ड स्टोरेज, और मशीनरी खरीदने के लिए बड़ी सब्सिडी दी जाएगी।
- 40 से 50% सब्सिडी: ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, सपोर्टिंग सिस्टम और उन्नत बीजों पर सरकार 50 फीसदी तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
- बिना लॉटरी का लाभ: आम योजनाओं के विपरीत, इस प्रोजेक्ट में शामिल किसानों को लॉटरी का इंतजार नहीं करना होगा; पात्र सभी किसानों को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।
एफपीओ (FPO) के जरिए आत्मनिर्भर बनेंगे किसान
इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को किसान उत्पादक संगठन (FPO) के रूप में संगठित होना होगा। इसके लिए कुछ कड़े लेकिन लाभकारी नियम तय किए गए हैं:
- न्यूनतम रकबा: मुख्य फसल (टमाटर, आलू या प्याज) का रकबा कम से कम 5 हजार हेक्टेयर होना चाहिए।
- वैल्यू: क्लस्टर की कुल फसल की वैल्यू 100 करोड़ रुपये तक पहुंचना अनिवार्य है।
- वित्तीय मॉडल: लागत का लगभग 45 से 55 फीसदी हिस्सा सरकार अनुदान के रूप में देगी, जबकि शेष राशि बैंक फाइनेंस और किसानों के योगदान से पूरी होगी।
पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया
भ्रष्टाचार रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हॉर्टिकल्चर बोर्ड ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। किसान संगठनों को एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर सत्यापन करेगी और उसके बाद सब्सिडी की राशि Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से सीधे किसानों के खाते में भेजी जाएगी।
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रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
छोटे किसान मिलकर एफपीओ बना सकते हैं। इसके लिए नोडल एजेंसी के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जिसकी फीस लगभग 1.18 लाख रुपये है। अधिकारी बताते हैं कि किसान समूह बनाकर यह राशि आसानी से जुटा सकते हैं और भविष्य में मिलने वाले करोड़ों के लाभ का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।