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एमपी में पहली बार होम्योपैथी से अधिक आयुर्वेद की सीटें खाली, 1100 से अधिक सीटों पर नहीं मिले अभ्यर्थी

MP News: प्रदेश में पहली बार ऐसा हुआ है जब स्नातक पाठ्यक्रम में होम्योपैथी से अधिक सीटें आयुर्वेद की रिक्त रह गई हैं। प्रवेश के लिए तीन चरण की काउंसलि...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 24 Nov 2025 09:19:00 PM (IST)Updated Date: Mon, 24 Nov 2025 09:19:00 PM (IST)
एमपी में पहली बार होम्योपैथी से अधिक आयुर्वेद की सीटें खाली, 1100 से अधिक सीटों पर नहीं मिले अभ्यर्थी
होम्योपैथी से अधिक सीटें आयुर्वेद की रिक्त रह गई।

HighLights

  1. स्नातक पाठ्यक्रम में होम्योपैथी से अधिक सीटें आयुर्वेद की रिक्त रह गई
  2. होम्योपैथी की 801, यूनानी की 47 सीटों समेत कुल 2007 सीटें खाली
  3. आयुष मेडिकल एसोसिएशन ने कटऑफ कम करने की मांग की

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में पहली बार ऐसा हुआ है जब स्नातक पाठ्यक्रम में होम्योपैथी से अधिक सीटें आयुर्वेद की रिक्त रह गई हैं। प्रवेश के लिए तीन चरण की काउंसलिंग के बाद शासकीय और निजी मिलाकर आयुर्वेद कॉलेजों में 1159 सीटें नहीं भर पाईं। होम्योपैथी और यूनानी कॉलेजों में में 47 रिक्त रह गई हैं।

कॉलेजों की अधिक संख्या बड़ा कारण

जानकारों के अनुसार आयुर्वेद कालेजों की सीटें रिक्त होने का बड़ा कारण कॉलेजों की अधिक संख्या है। लगातार नए निजी कॉलेज खुल रहे हैं, पर बीएएमएस की डिग्री पूरी करने वाले डॉक्टरों में लगभग 10 प्रतिशत को ही शासकीय या निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिल पाते हैं।


कुल 2007 सीटें खाली

एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डेय ने कहा कि आयुष (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) की 2007 सीटें खाली हैं। नीट पर्सेंटाइल कम से कम 10 प्रतिशत कम करने के साथ ही काउंसलिंग का एक और अतिरिक्त चरण कराने की आवश्यकता है। अभी स्ट्रे वैकेंसी चरण की काउंसलिंग चल रही है। इसमें रिक्त सीटें में 15 से 20 प्रतिशत ही भरी जाने के आसार हैं।

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आयुर्वेद के 7 शासकीय और 32 निजी कॉलेज संचालित

एसोसिएशन की तरफ से केंद्रीय आयुष मंत्रालय, एमपी आयुष विभाग, आयुक्त आयुष को भी पत्र लिख रहे हैं। बता दें के आयुर्वेद के सात शासकीय और 32 निजी कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जबकि होम्योपैथी का एक शासकीय और 19 निजी, यूनानी का एक शासकीय और तीन निजी कालेज संचालित हो रहे हैं।