
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। रेलवे स्टेशनों पर वैसे तो नियमानुसार 15 मिनट का समय यात्रियों को लेने और छोड़ने के लिए पर्याप्त माना जाता है, लेकिन जब स्टेशन परिसर में भीड़ और ऑटो चालकों की मनमर्जी जारी हो तो यह समय आधा घंटे में कब तब्दील हो जाता है, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। ऐसे ही हालात शहर के मुख्य भोपाल रेलवे स्टेशन और वर्ल्ड क्लास रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर देखने को मिल रहे हैं।
दोनों स्टेशनों के प्लेटफार्म नंबर एक पर जैसे ही ट्रेन आती है तो वहां यात्रियों को लेने के लिए ऑटो, कार और बाइक की लंबी कतार लग जाती है। इस दौरान वाहन चालक जहां-तहां अपने ऑटो और गाड़ियां खड़ी कर देते हैं, जिससे रास्ते संकरे हो जाते हैं और जाम की स्थिति बन जाती है। नतीजा यह होता है कि जो लोग केवल कुछ मिनट के लिए यात्रियों को लेने और छोड़ने के लिए आते हैं, वह चाहकर भी समय पर बाहर नहीं निकल पाते। इससे उनको 15 मिनट की मुफ्त पार्किंग का अवसर भी हाथ से निकल जाता है।
स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां ऑटो चालकों की संख्या जरूरत से ज्यादा रहती है और वे किसी भी जगह वाहन घुसा देते हैं। इससे न सिर्फ अव्यवस्था फैलती है, बल्कि आम लोगों को समय पर निकलने में भी भारी दिक्कत होती है। उनका कहना है कि यह समस्या कोई एक-दो दिन की नहीं, बल्कि रोज की कहानी बन चुकी है, जिस पर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं किया गया है।
"मैं अपने माता-पिता को यहां लेने के लिए आया था, बुजुर्ग होने की वजह से मैंने उन्हें बाहर आने के लिए नहीं कहा, मैं उनको लेने गाड़ी अंदर ले आया, लेकिन यहां इतनी भीड़ थी कि 15 मिनट की मुफ्त पार्किंग भी कम पड़ गई। क्योंकि यहां ऑटो वालों ने अपना अड्डा बना रखा है।" - उमेश वशिष्ट, यात्री के स्वजन
"मुफ्त पार्किंग का कोई फायदा नहीं मिल रहा, क्योंकि गेट पर हमेशा जाम लगा रहता है और गाड़ियां फंस जाती हैं। व्यवस्था ठीक हो तो लोग समय पर निकल सकें, वरना ये नियम बेकार है और मजबूरन हमें पैसे देने ही पड़ते हैं।" - नीलेश मिश्रा, यात्री
आरकेएमपी स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर जगह कम होने के कारण यहां हमेशा भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है। इसके विपरीत, प्लेटफार्म नंबर-पांच पर स्थान पर्याप्त है और भीड़ भी अपेक्षाकृत कम रहती है, इसलिए वहां इस तरह की समस्याएं नहीं होतीं। वहीं, भोपाल जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक पर एग्जिट के लिए दो गेट बनाए गए हैं, लेकिन अक्सर पार्किंग ठेकेदार इनमें से एक गेट बंद रखता है।
इसके चलते एक ही गेट से लोगों की आवाजाही होती है और इतनी भीड़ जमा हो जाती है कि पिक एंड ड्रॉप के लिए आने वाले लोग 15 मिनट के भीतर बाहर नहीं निकल पाते। यही वजह है कि अधिकांश यात्रियों को 15 मिनट का समय बहुत कम लगता है। यदि अतिव्यस्त समय में दोनों गेट खुले रखे जाएं, तो भीड़ का दबाव कम होगा, जिससे यात्री मुफ्त पार्किंग का लाभ ले सकेंगे। - मुकेश अवस्थी, सदस्य, सलाहकार समिति, पश्चिम मध्य रेलवे
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