MP के जंगलों से निकलेगा 'सोना', 11 जिलों में बनेंगे शहद और मशरूम क्लस्टर, ग्रामीणों की बढ़ेगी आय
MP News: मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचलों की प्राकृतिक संपदा अब ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य आधार बनेगी। प्रदेश सरकार ने जंगली मशरूम और शहद उत्पादन को व ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 10 Jan 2026 06:22:11 PM (IST)Updated Date: Sat, 10 Jan 2026 06:22:11 PM (IST)
MP के जंगलों से निकलेगा 'सोना'।HighLights
- आदिवासी अंचलों में स्वरोजगार की नई क्रांति
- MP के 11 जिलों में बनेंगे फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स
- शहद-मशरूम से बदलेंगे ग्रामीणों के दिन
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचलों की प्राकृतिक संपदा अब ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य आधार बनेगी। प्रदेश सरकार ने जंगली मशरूम और शहद उत्पादन को वैज्ञानिक तरीके से प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य के 11 चयनित जिलों में शहद और मशरूम उत्पादन के विशेष क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।
शहद और मशरूम के लिए जिलों का चयन
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजना के अनुसार, प्रदेश के 5 जिलों अनूपपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी और मंडला में जंगली शहद के संकलन और मधुमक्खी पालन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वहीं, नर्मदापुरम, बालाघाट, उमरिया, बुरहानपुर, ग्वालियर और जबलपुर सहित 6 जिलों में मशरूम उत्पादन के 'आजीविका क्लस्टर' स्थापित किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि बालाघाट जिला दोनों ही श्रेणियों में शामिल है।
पीएमएफएमआइ योजना से मिलेगा प्रोजेक्ट को बल
इन क्लस्टरों की स्थापना 'प्रधानमंत्री फारमलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इंटरप्राइजेज स्कीम' (PMFME) के अंतर्गत की जा रही है। विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी ने हाल ही में जिला पंचायत सीईओ के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर इस प्रोजेक्ट की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि जिला स्तर पर प्रोड्यूसर ग्रुप (उत्पादक समूह) गठित किए जाएं और उनकी प्रगति की निरंतर निगरानी की जाए। सभी जिलों को जल्द से जल्द अपने प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर राज्य कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
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जंगली मशरूम को मिलेगी नई पहचान
आदिवासी क्षेत्रों में जंगली मशरूम न केवल एक लोकप्रिय व्यंजन है, बल्कि पोषण का भी बड़ा स्रोत है। वर्तमान में यह केवल वर्षा ऋतु तक ही सीमित रहता है, लेकिन क्लस्टर बनने और प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना से इसके व्यावसायिक उत्पादन और संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का उद्देश्य इन सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करना और ग्रामीणों को उनके उत्पादों का सही मूल्य दिलाना है।