
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल के जिंसी क्षेत्र में स्थित स्लाटर हाउस (बूचड़खाना) अब एक बड़े राष्ट्रीय विवाद के केंद्र में आ गया है। गोकशी के आरोपों में सील किए गए इस परिसर से जुड़े मामले में अब नया मोड़ आया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भोपाल में अवैध रूप से करीब 250 रोहिंग्या प्रवासियों को बसाने और उन्हें जाली दस्तावेजों के आधार पर रोजगार दिलाने के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले में पुलिस द्वारा पेश की गई जांच रिपोर्ट को 'सतही और भ्रामक' बताते हुए खारिज कर दिया है। आयोग ने 30 सितंबर 2025 को मामले का संज्ञान लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस कमिश्नर, भोपाल को 10 दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।
30 अक्टूबर 2025 को सौंपी गई पुलिस रिपोर्ट में कहा गया कि शिकायतकर्ता का पता न होने के कारण उससे संपर्क नहीं हो सका और स्थानीय पूछताछ में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। हालांकि, आयोग ने इस रिपोर्ट को सिरे से नकारते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग को वास्तविक मुद्दे से किया भ्रमित आयोग ने स्पष्ट किया कि एक ओर रिपोर्ट में आरोपों को निराधार बताया गया है, वहीं दूसरी ओर असलम कुरैशी के बयान में यह स्वीकार किया गया है कि मजदूर पश्चिम बंगाल, असम और बिहार जैसे सीमावर्ती राज्यों से लाए जा रहे हैं और उनके रहने की व्यवस्था उसकी निजी संपत्ति में है। जांच अधिकारी ने यह जांचने की जहमत नहीं उठाई कि इन मजदूरों के पास मौजूद पहचान पत्र असली हैं या नहीं और क्या उनकी मूल स्रोत से पुष्टि की गई है। आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता की तलाश के नाम पर पुलिस वास्तविक मुद्दे को 'भ्रमित' करने का प्रयास कर रही है ।
जिंसी स्थित यह स्लाटर हाउस सरकारी भूमि पर और सरकारी धन से संचालित है। गोकशी की पुष्टि के बाद अब अवैध प्रवासियों को संरक्षण देने के आरोपों ने जिला प्रशासन और नगर निगम की निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान परिदृश्य में यह सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलाव का एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। मानवाधिकार आयोग ने अब कलेक्टर और पुलिस आयुक्त, भोपाल को सात दिनों के भीतर एक अतिरिक्त और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में स्लाटर हाउस की शिकायत करने वाले प्रीत सिंह सिरोही ने बताया कि स्लाटर हाउस की आड़ में भोपाल में बसाए गए रोहिंग्याओं को लेकर हमने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में शिकायत की थी। इसे मानव अधिकार आयोग ने पुलिस को जांच के लिए भेजा था, लेकिन भोपाल पुलिस ने उनसे बात किए बिना ही शिकायत को बंद कर दिया। अब इसी स्लाटर हाउस में गोकशी किए जाने की पुष्टि हुई है। यदि पुलिस समय रहते इस मामले में संज्ञान ले लेती तो स्लाटर हाउस में गोकशी की घटना नहीं होती।
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हम हिंदुओं के लिए गाय पूजनीय है और हिंदु समाज के लोग स्लाटर में काम करते तो गोकशी की घटना नहीं होती। यहां असलम चमड़े ने 250 अवैध रोहिंग्याओं को भोपाल में पुरानी दालमिल मक्का मस्जिद के पीछे स्थित क्षेत्र में बसाया है, जो नगर निगम के सरकारी पैसे से बने स्लाटर हाउस में गोकशी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। अब गोकशी का मामला सामने आया है तो फिर से इस मामले की जांच की जानी चाहिए और जो रोहिंग्या भोपाल में बसाए गए हैं उन्हें बाहर निकालना चाहिए।
भोपाल पुलिस ने हमें जांच रिपोर्ट भेजी थी उसमें शिकायतकर्ता की तलाश के नाम पर पुलिस ने वास्तविक मुद्दे को 'भ्रमित' करने का प्रयास किया। हमने भोपाल कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर जबाव मांगा है। अभी तक हमें जबाव नहीं मिला है- प्रियंक कानूनगो, सदस्य, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग।