
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। इंदौर में सीवेज मिले दूषित पानी से अब तक 21 मौतें हो चुकी हैं। इसके बाद अब शहर के लोग पेयजल को लेकर सचेत हो गए हैं। ऐसे में अब शहर में कई लोगों ने शुद्ध पेयजल की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए पानी पर भी रुपए खर्च करना शुरू कर दिया है, ताकि वे भविष्य में होने वाली बीमारियों से बच सकें। इसके लिए कोई पैसे खर्च कर पानी का जार मंगवा रहे हैं तो किसी ने हजारों रुपए खर्च पानी शुद्ध कराने के लिए अपने घर में लिवप्योर का सब्सक्रिप्शन ले रखा है।
वहीं, कई लोग पानी का उबाल कर पी रहे हैं। इंदौर में हुई घटना के बाद कई शहरवासी नगर निगम द्वारा सप्लाई होने वाले को सुरक्षित नहीं मान रहे हैं और अब तो शहर में सप्लाई होने वाले में भी ई-कोलाई बैक्टीरिया मिल चुका है। शहर में भी नगर निगम की जांच में तीन क्षेत्रों के चार सैंपल में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला। ऐसे में अब शहरवासी पानी के लिए भी पैसे खर्च कर रहे हैं।
इंदौर में दूषित पानी से मौतें होने के बाद नगर निगम के अमले द्वारा शहर विभिन्न हिस्सों में लगातार पानी की जांच की जा रही है। इसमें बीते दिनों खानूगांव, बाजपेई नगर और आदमपुर के पानी सैंपल में भी जानलेवा ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला था। यह वही बैक्टीरिया है, जिसकी वजह से इंदौर में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी हैं और 12 मरीज अब भी आइसीयू में हैं। इस पूरे मामले में अब तक 400 से अधिक मरीज अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं।
पेयजल पर रुपए खर्च करने के पीछे शहरवासियों का तर्क परिजनों की सेहत को लेकर हैं। उनका कहना है कि घर के बड़ों की इम्यूनिटी तो मजबूत होती है वे तो इससे निकल सकते हैं। लेकिन बच्चों को बुजुर्गों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, जिससे उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए अपने पेयजल में उन्होंने बदलाव किया है।
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स्मार्ट प्योरीफायर लगवाया है
शुद्ध पेयजल की सप्लाई को लेकर हमने पहले से ही लिवप्योर स्मार्ट का वॉटर प्योरीफायर लगवाया हुआ है, जिसमें हर माह एक हजार का सब्सक्रिप्शन लेना होता है। पानी के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं, लेकिन इससे हम पानी से होने वाली बीमारियों से सुरक्षित महसूस करते हैं। इंदौर के मामले के बाद तो पानी को लेकर ओर भी अधिक डर लगने लगा है- प्रिया राठौर, नेहरू नगर।
हम पहले नर्मदा लाइन का पानी ही पीते थे, लेकिन घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं। इंदौर में सीवेज मिला पानी सप्लाई होने और उस दूषित पानी से लोगों की मौतें होने और शहर में भी दूषित पानी मिलने के बाद हमने पीने के लिए पानी का मंगवाना शुरू कर दिया है, ताकि दूषित पानी न आए। दूषित पानी से खुद के साथ ही बच्चों के बीमार होने का खतरा भी बना रहता है- सुरेंद्र मालवीय, करोंद।
इंदौर में सीवेज मिला पानी पीने से हुई मौतों और शहर में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने की खबरों के बाद हमने घर में पानी को उबालकर पीना शुरू कर दिया है। खासकर बुजुर्ग और बच्चों के लिए अलग से पानी उबालकर रखा जाता है। यह अतिरिक्त मेहनत जरूर है, लेकिन सेहत के सामने यह जरूरी हो गया है। जब तक प्रशासन पानी की गुणवत्ता को लेकर पूरी तरह भरोसेमंद व्यवस्था नहीं करता, तब तक सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है- मो. साजिद, खानूगांव।