
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं ने पूरे मध्य प्रदेश को ठिठुरा दिया है। सोमवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन और रात के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। वहीं दृश्यता 50 से 200 मीटर रही। राजगढ़, विदिशा, भोपाल, सीहोर, खंडवा, रतलाम, उज्जैन, दतिया, ग्वालियर, टीकमगढ़ में कोल्ड-डे रहा।
कई जिलों में पारा सामान्य से तीन से पांच डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया, जिससे जनजीवन के साथ-साथ खेती पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इस दौरान प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान शहडोल के कल्याणपुर में 3.8 डिग्री और दतिया का 4.4 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान रायसेन का 26.0 डिग्री और छिंदवाड़ा का 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड अंचल में ठंड का प्रकोप सबसे अधिक रहा। अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकांश सभी जिलों में मध्यम से अति घना कोहरा छाएगा। कई इलाकों में शीतलहर चलेगी व मौसम शुष्क रहेगा।
| शहर | अधिकतम तापमान (°C) | न्यूनतम तापमान (°C) |
|---|---|---|
| भोपाल | 18.4 | 6.8 |
| इंदौर | 22.0 | 8.6 |
| ग्वालियर | 19.6 | 6.4 |
| जबलपुर | 20.4 | 9.0 |
बुंदेलखंड में रात को कोहरा छा रहा है और दिनभर ठिठुरन लोगों को कंपकंपा रही है। सोमवार को छतरपुर जिले के नौगांव में न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस तो खजुराहो में 5.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है। स्थिति यह हैं कि ओस की बूंदें जमने लगी हैं। ठिठुरन लगातार बढ़ रही है।
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तापमान के पांच डिग्री या उससे नीचे जाने से फसलों पर पाले का खतरा बढ़ गया है। अरहर, चना, मटर, सरसों और सब्जियों को सबसे अधिक नुकसान की आशंका है। विशेषज्ञों के मुताबिक पाले से पैदावार में 50 से 80 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों को अगले 48 घंटे बेहद अहम बताते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि शाम के समय हल्की सिंचाई करें। रात में खेतों के किनारे धुआं करने के साथ घुलनशील सल्फर का छिड़काव पाले से बचाव में मददगार हो सकता है।
मालवा-निमाड़ अंचल में तापमान गिरने और लगातार कोहरा छाने से रबी सीजन की फसलों पर संकट गहराता जा रहा है। खंडवा जिले में करीब 78 हजार 700 हेक्टेयर में बोई गई चना के पौधों की पत्तियां कोहरा और ओस के कारण पीली होकर जलने लगी हैं, वहीं फूल झड़ने की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। फल, सब्जी और औषधीय फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता दिख रहा है। कई खेतों में अरबी के पत्ते पीले पड़ गए हैं और वृद्धि रुक गई है।