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करोड़ों की काली कमाई पर आयकर विभाग का शिकंजा, पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा का स्कूल अटैच, मां और दोस्त थे ट्रस्टी

Income Tax Raid: आयकर विभाग की बेनामी निषेध इकाई (Benami Prohibition Unit) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भोपाल स्थित उस आलीशान स्कूल को अस्थायी तौर पर अटै...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 17 Jan 2026 09:57:22 PM (IST)Updated Date: Sat, 17 Jan 2026 09:57:22 PM (IST)
करोड़ों की काली कमाई पर आयकर विभाग का शिकंजा, पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा का स्कूल अटैच, मां और दोस्त थे ट्रस्टी
करोड़ों की काली कमाई पर आयकर विभाग का शिकंजा।

HighLights

  1. भोपाल में आयकर विभाग का बड़ा एक्शन
  2. सौरभ शर्मा के बेनामी साम्राज्य का भंडाफोड़
  3. मां और करीबियों के नाम पर बन रहा था स्कूल

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। आयकर विभाग की बेनामी निषेध इकाई (Benami Prohibition Unit) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भोपाल स्थित उस आलीशान स्कूल को अस्थायी तौर पर अटैच (Provisional Attachment) कर लिया है, जिसका असली मालिक परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को माना जा रहा है। जांच में सामने आया है कि इस स्कूल के निर्माण में करोड़ों रुपये की काली कमाई का निवेश किया गया था।

ट्रस्ट के नाम पर छिपाई जा रही थी बेनामी संपत्ति

यह स्कूल लगभग साढ़े सात करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा था। आधिकारिक दस्तावेजों में इसे 'राजमाता (भारतमाता) शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति, भोपाल' के नाम पर पंजीकृत कराया गया है। इस ट्रस्ट में सौरभ शर्मा की मां उमा शर्मा, उनके सहयोगी चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल ट्रस्टी के रूप में दर्ज हैं। आयकर विभाग की बेनामी विंग पिछले एक साल से इस मामले की गहन जांच कर रही थी।


ट्रस्टी नहीं, सौरभ है असली मालिक

आयकर विभाग की जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि ट्रस्ट में दर्ज व्यक्तियों (बेनामीदारों) के पास इतना पैसा नहीं था कि वे इस स्तर का निर्माण करा सकें। दस्तावेजों की कड़ाई से पड़ताल करने के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि ट्रस्ट के पीछे असली चेहरा सौरभ शर्मा का ही है और सारा पैसा उसी ने लगाया है। इसी आधार पर संपत्ति को अटैच करने की कार्रवाई की गई है। विभाग ने अब सौरभ शर्मा और संबंधित बेनामीदारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

लोकायुक्त छापे में मिला था सोने और नगदी का अंबार

सौरभ शर्मा का मामला दिसंबर 2024 में तब सुर्खियों में आया था, जब लोकायुक्त की टीम ने उनके आवास और कार्यालय पर छापा मारा था। उस दौरान लगभग 8 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ था। कार्रवाई के अगले ही दिन भोपाल में एक खाली प्लॉट में खड़ी कार से 52 किलो सोना और 10 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे, जिसे आयकर विभाग ने जब्त किया था।

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मुख्य आरोपी फिलहाल सलाखों के पीछे

भ्रष्टाचार के इस मामले में लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा, चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को गिरफ्तार किया था। वर्तमान में मुख्य आरोपी सौरभ शर्मा और उसका सहयोगी शरद जायसवाल जेल में हैं, जबकि चेतन सिंह गौर को जमानत मिल चुकी है। आयकर विभाग की इस नई कार्रवाई ने आरोपियों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।